जिला पंचायत चुनाव की मतगणना में फर्जी मतपत्र पकड़े जाने पर खासा बवाल हुआ। लेकिन ये मतपत्र कैसे और कहां से आए, इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं था। पहली बार इस तरह का मामला सामने आने पर पंचायत चुनाव के पुराने धुरंधर भी हैरान हैं। इस पूरे मामले में जहां इन मतपत्रों को निरस्त करते हुए पर्यवेक्षक ने संबंधित पीठासीन अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कराने की बात कही है। वहीं, जनता में इसे लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं।
रविवार सुबह मतगणना शुरू होने के बाद पहला मामला हस्तिनापुर के जिला पंचायत के वार्ड दो में सामने आया। यहां कुल 47 मत पत्र ऐसे पाए गए जिन पर पीठासीन अधिकारी की मुहर और हस्ताक्षर नहीं थे। जबकि नियमानुसार प्रत्येक मतपत्र पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर होती है। इसे लेकर काफी हंगामा हुआ और करीब एक घंटा तक मतगणना रुकी रही। इसके बाद सभी मतपत्र निरस्त कर दिए गए।
इसके बाद माछरा ब्लॉक में जिला पंचायत के वार्ड 28 में ग्राम रहदरा के बूथ 6 की मतपेटी से 90 और ग्राम अमीनाबाद उर्फ बड़ागांव के बूथ पांच की पेटी से भी 85 मतपत्र ऐसे ही मिले। यहां भी हंगामा हुआ और मतगणना रुकी रही। बाद में इन मतपत्रों को अलग कर गणना शुरू हुई। लेकिन इन मतपत्रों पर निर्णय हो पाता, इससे पहले ही शाम को वार्ड 31 में भी करीब 44 मत पत्र ऐसे ही मिल गए और मतगणना यहां भी रुक गई।
ये उठे सवाल
-जब हर एक मतपत्र पीठासीन अधिकारी हस्ताक्षर और मुहर लगाकर जारी करते हैं, तो यह कहां से आए
-क्या पीठासीन अधिकारी ने मतपत्रों को रात में ही तो किसी एक पक्ष को जारी नहीं कर दिए और बाद में जब सुबह मतदान हुआ तो पेटी में किसी एक पक्ष के मतदाताओं ने इनको डाल दिया हो
-कहीं ऐसा तो नहीं कि जब मतगणना स्थल से सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव हुआ था, तभी इन मतपत्रों को मतपेटियों के भीतर डाला गया हो