पंचायत चुनाव धुरंधरों की पोल खोल गया। मंत्री हों या कद्दावर नेता, सभी को मतदाताओं ने ऐसा नकारा कि उनके माथे पर पसीना साफ नजर आया। बड़ी जीत तो दूर कई तो सम्मानजनक हार भी नहीं ले पाए। इस उठापटक में चाहे मंत्री हों या वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष, सभी को मतदाताओं ने जता दिया कि दावे चाहे कितने कर लिए जाएं लेकिन जनता का फैसला ही निर्णायक होता है।
इस बार का पंचायत चुनाव पिछले चुनावों से कुछ अलग होने के कारण रोचक था। इसमें कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से दांव पर थी। इनमें कई ऐसे नेता भी रहे जो काम और व्यवहार के बल पर जीत का दावा ठोक रहे थे तो सत्ता बल पर भी जीत का दावा लेकर कई मैदान में डटे थे। मतदाताओं के आगे किसी की दाल नहीं गली और चुनाव परिणाम ने सबकी कलई खोलकर रख दी।
कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर ने अपने सर्वाधिक प्रभावशाली वार्ड से बेटे नवाजिश मंजूर को अध्यक्ष पद की दावेदारी के साथ मैदान में उतारा था। लेकिन मुस्लिम मतों के बराबर बंटवारे और हिंदू मतों के उनके विरोध के ध्रुवीकरण ने सारा खेल बिगाड़ दिया। सपा एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल ने भी अपने भतीजे अजय अग्रवाल को इसी सोच के साथ वार्ड 22 से मैदान में उतारा था, लेकिन यहां पर सपा में ही उनके विरोधी गुट ने उनको घेर लिया और सारी कवायद धरी रह गयी।
वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह सपा में हैं, लेकिन वार्ड परिसीमन और फिर आरक्षण को लेकर वह बगावती सुर में आ गए। मनिंदरपाल सिंह अकेले दम पर अपने काम और व्यवहार की बात कहकर लगातार तीसरी बार जीत का सपना लेकर मैदान में उतरे तो अपनी पत्नी सिंपल सिंह को भी इस बार चुनाव लड़वा दिया। लेकिन मतदाताओं ने इस बार दोनों को ही नकार दिया। वहीं, अप्रत्यक्ष रुप से सरधना विधायक संगीत सोम, विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, राज्य एससीएसटी आयोग के उपाध्यक्ष मुकेश सिद्धार्थ की प्रतिष्ठा इस चुनाव से जुड़ी थी और सभी को झटका लगा है।
वहीं, दूसरी तरफ बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने एक बार फिर इस चुनाव में अपनी पकड़ मजबूती से दिखायी है। वार्ड चार से जहां उनके करीबी दोस्त बंटी सांधन जीत की तरफ बढ़ते नजर आए तो वार्ड छह और आठ में वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह को भी झटका उन्हीं के कारण मिला। इसके साथ ही उन्होंने कई वार्ड में अपने समर्थन से कई के गणित को बिगाड़ा। इनके साथ ही भाजपा दक्षिण विधायक रविंद्र भड़ाना भी वार्ड 21 से भाजपा प्रत्याशी कुसुम चौहान को जिताने में कामयाब हुए और अपनी प्रतिष्ठा बचायी।