विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सपा ने वेस्ट यूपी में सियासी संगीत की नई सरगम (सैनी, राजपूत, गुर्जर और मुस्लिम) तैयार की है। शनिवार को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भले ही वेस्ट के कई दिग्गजों की उम्मीदों पर पानी फिर गया हो, लेकिन पार्टी थिंक टैंक ने सरगम पर ही फोकस किया है।
मंत्रिमंडल में सैनी, राजपूत, गुर्जरों और मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व मजबूत कर इन्हें साधने की पुरजोर कोशिश की है। तभी तो पार्टी ने सैनी समाज के एमएलसी को कैबिनेट में जगह दी है, तो अन्य को मजबूत कर स्पष्ट किया है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की नीति क्या होगी?
शनिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी मंत्रिमंडल का विस्तार किया। 21 मंत्रियों की नई टीम बनाई। इनमें 12 चेहरे नए हैं तो नौ का प्रमोशन हुआ है। पार्टी के इस कदम पर वेस्ट यूपी के कई सपाई दिग्गजों की निगाह जमी थी। उम्मीद भी थी और कोशिश भी कि इस फेरबदल में जगह मिल सके।
दरअसल, चितरंजन स्वरूप के बाद वैश्य कोटे की एक सीट खाली होने से जहां मेरठ से एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल का दावा मजबूत माना जा रहा था तो बिजनौर की विधायक रुचि वीरा भी इस दौड़ में शामिल मानी जा रही थीं। दोनों को ही आजम खां का करीबी भी माना जाता है। एमएलसी आशु मलिक और नगीना विधायक मनोज पारस भी इस कतार में शुमार थे। लेकिन, सपा ने पत्ते खोले तो नया समीकरण सामने आया। इन सभी की उम्मीदों पर तुषारापात हो गया।
दांव पुराना, अंदाज नया
सपा हाईकमान ने इस बार जहां सैनी बिरादरी की तरफ पासा फेंका तो अपना पुराना दांव नए अंदाज में खेल दिया। सहारनपुर से एमएलसी साहब सिंह सैनी को कैबिनेट में शामिल कर साफ कर दिया कि सपा सैनी बिरादरी को मिशन-2017 का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने जा रही है। वेस्ट में इस जाति की जबरदस्त पैठ भी है। ऐसे में सपा का यह कदम बेहद सधा हुआ माना जा रहा है। इसके अलावा रामसकल गुर्जर को प्रमोट किया गया है।
रामसकल पहले से ही मंत्री हैं, पर अब उन्हें स्वतंत्र प्रभार का दर्ज दिया गया है। वह मेरठ लोकसभा के प्रभारी रह चुके हैं। साथ ही बुलंदशहर के प्रभारी मंत्री भी हैं। एक तरफ समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान को लगातार सरकार के नजदीक दिखाने की कवायद और उस पर रामसकल के प्रमोशन का पैंतरा सपा थिंक टैंक का सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। वेस्ट में सपा लगातार गुर्जरों को साधने का प्रयास कर रही है। यह इसी का नतीजा माना जा रहा है।
अभी तो चालें शुरू हुई हैं
राजपूत यानी ठाकुर वोटों में सेंध लगाने के लिए सपा बेहद चतुराई से आगे बढ़ी है। बिजनौर के मूलचंद चौहान को प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार दिया गया है तो मदन चौहान का कद भी बढ़ाया गया है। मदन मूलरूप से सरधना (मेरठ) के गांव मदारपुर के रहने वाले हैं। वर्ष-2002, 2007 और 2012 का विधानसभा चुनाव जीतकर वह हैट्रिक लगा चुके हैं। मदन को इसका लाभ भी मिला। हालांकि, नई टीम से वेस्ट में मुस्लिमों को नया प्रतिनिधित्व नहीं मिला, लेकिन मेरठ के शाहिद मंजूर को पहले कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर सपा मुस्लिम दांव खेल चुकी है। साथ ही कई लोगों को राज्यमंत्री का दर्जा दे चुकी है। सारी पटकथा विधानसभा चुनाव को ध्यान रखकर लिखी जा रही है। माना जा रहा है कि अभी से बिछ चुकी चुनावी बिसात पर और चालें चली जाएंगी, जिनमें कुछ को इनाम तो कुछ को हाशिये पर रखा जाएगा।