जिला पंचायत की सबसे वीआईपी और चर्चित सीट वार्ड 31 पर इस बार पुलिस प्रशासन और जनता के साथ दावेदारों की भी विशेष नजर रहेगी। राधना बवाल के बाद प्रत्याशी जहां पूरी तरह जान झोंकने के लिए तैयार हो चुके हैं। वहीं, किसी भी बवाल से बचने के लिए प्रशासन भी इस बार कोई रिस्क उठाना नहीं चाहेगा। हालांकि इस सियासी वार्ड की चुनावी सियासत में सबसे ज्यादा सवाल पुलिस-प्रशासन पर ही उठ रहे हैं।
वार्ड 31 से कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश मंजूर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने मुख्य रुप से बसपा के वसीम जब्बार और भाजपा की मंजू बाला हैं। इस वार्ड के माछरा ब्लॉक अंतर्गत आने वाले गांवों में 13 अक्तूबर को हुए मतदान में नवाजिश मंजूर और वसीम जब्बार समर्थकों में कई जगह हंगामे और झड़प के बीच ग्राम राधना में जमकर बवाल कटा।
अब इस वार्ड के तहत परीक्षितगढ़ ब्लॉक के अति संवेदनशील गांव ललियाना, छुछाई, शौंदत्त, बौंद्रा, नवलसूरजपुर और अतलपुर में मतदान है।
यह चरण इस वार्ड के प्रत्याशियों का भाग्य भी तय करेगा। क्याेंकि सबसे ज्यादा मतदाता इसी चरण में हैं। ऐसे में शनिवार को होने वाला मतदान सभी के लिए करो या मरो की स्थिति में रहेगा। इस चरण में ग्राम ललियाना, शौंदत्त और बौंद्रा पर सभी की विशेष नजरें होंगी। क्योंकि नवाजिश और वसीम दोनों की समर्थक बिरादरी इन्हीं गांवों में है। ये वो गांव हैं, जहां पर आपसी रंजिश और गुटबाजी भी सबसे ज्यादा है।
पुलिस-प्रशासन पर रहेगी नजर
पहले चरण में राधना में पुलिस और प्रशासन पर बवाल की अनदेखी के आरोप लगे थे। बसपा समर्थकों ने आरोप लगाया था कि प्रशासन ने सपा प्रत्याशी के दबाव में काम किया और बवाल को अनदेखा किया। ऐसे में इस बार पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी पूरी नजर रहेगी। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि इन गांवों में मतदान को लेकर गोपनीय रणनीति तैयार हुई है। जिसके तहत बाहर से सैकड़ों की संख्या में लोग शुक्रवार रात तक इन गांवों में पहुंच जाएंगे।
विरोधी पक्ष के मतदाताओं की सूची तैयार कर सुबह ही उनके नाम की पर्ची से वोट डाले जाएंगे। यह काम दोपहर तक चलेगा और इसके बाद कहीं भी हंगामा या बवाल की आशंका इस क्षेत्र के लोग जता रहे हैं। सूत्रों की मानें तो राधना में भी इसी तरह की रणनीति पर थोड़ा काम हुआ था, लेकिन मुख्य मार्ग पर ग्राम होने के कारण अधिकारियों की आवाजाही से यहां पर यह रणनीति ज्यादा कारगर नहीं हो सकी।
खुफिया विभाग भी सक्रिय
राधना बवाल के बाद खुफिया विभाग भी सक्रिय हो गया है। लेकिन खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर भी ग्रामीण संदेह जता रहे हैं। उनका कहना है कि राधना को लेकर पहले से सारी सूचनाएं खुफिया विभाग के पास थीं। इसके बावजूद इसे रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति नजर नहीं आयी। इस बार भी ऐसा नहीं होगा, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।