फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तप से ही मिटते हैं कर्मों के बंधन : मुनि भाव भूषण महाराज

विज्ञापन
विज्ञापन
- त्रिमूर्ति जिनालय में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान में रविवार को भक्तों ने जाप्य अनुष्ठान किया
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान में रविवार को भक्तों ने जाप्य अनुष्ठान किया। श्री शांतिनाथ भगवान का अभिषेक किया।
विराजमान मुनि भाव भूषण महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर क्रोध, मान, माया, लोभ, ईर्ष्या और द्वेष जैसे विकार मौजूद रहते हैं। ये सभी अष्ट कर्मों के रूप में आत्मा पर जमकर उसे मलिन बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इन कर्म रूपी किट्टकों को केवल तप रूपी शोधन के माध्यम से ही हटाया जा सकता है।
विज्ञापन


मुनिश्री ने तप की महिमा बताते हुए कहा कि तप का महत्व इतना अधिक है कि देवता भी इसके लिए तरसते हैं और तपस्वियों को नमन कर स्वयं को धन्य मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कोई साक्षात तीर्थंकर ही क्यों न हो, उनके भी कर्मों का क्षय तप के माध्यम से ही संभव होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन में तप को धारण करना अत्यंत आवश्यक है। तप के माध्यम से ही आत्मा की शुद्धि होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह संयम और साधना के साथ तप का पालन करे और अपने कर्मों का नाश कर आत्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो। शांतिधारा करने का सौभाग्य वीरेंद्र कुमार जैन, सुधीर जैन, सिद्धांत जैन, गौरव जैन, राकेश जैन को सपरिवार प्राप्त हुआ। समस्त श्रद्धालुओं ने शांतिधारा के मंत्रों का श्रवण किया।
विज्ञापन



इस अवसर पर विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने माण्डले पर 1024 अर्घ्य चढ़ाए। विधानाचार्य पं0 मधुबन शास्त्री, ब्र. सुनीता दीदी, लीला दीदी पं. आशीष जैन, दिलीप जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें