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ईश्वर की अटूट भक्ति करनी चाहिए : रविशंकर

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कंकरखेड़ा स्थित मंदिर महादेव में श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन
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- पांच वर्ष के ध्रुव की तपस्या का प्रसंग सुनाया
- आज नंद जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। कंकरखेड़ा स्थित मंदिर महादेव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे कथा मर्मज्ञ संत रविशंकर ने भक्त ध्रुव के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति अटूट विश्वास का संदेश दिया।
कथा व्यास ने बताया कि राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को सौतेली माता सुरुचि के अपमान के बाद भगवान की प्राप्ति का संकल्प हुआ। माता सुनीति की प्रेरणा से मात्र पांच वर्ष की आयु में ध्रुव वन में तपस्या के लिए चले गए। मार्ग में देवर्षि नारद ने उन्हें ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप और भगवान विष्णु की उपासना का उपदेश दिया। कठोर तपस्या और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने ध्रुव को दर्शन दिए तथा उन्हें आकाश में अचल एवं सर्वोच्च स्थान का वरदान प्रदान किया। वह आज ध्रुव तारे के रूप में प्रसिद्ध है। कथा में मुख्य यजमान देवेंद्र वर्मा एवं रविंद्र शर्मा सपरिवार उपस्थित रहे। कथा आयोजक नीरज मित्तल ने बताया कि बुधवार को नंद जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
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कथा के समापन पर मंदिर समिति के सचिव नीरज मित्तल ने आरती की। इस अवसर पर आचार्य एवं पंडित संजय त्रिपाठी, केके गुप्ता, मदन गुप्ता, रामगोपाल शर्मा, नितिन जैसवाल, दीपक गुप्ता, पंकज गुप्ता, अंकित गुप्ता आदि रहे।
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