संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में शारदीय नवरात्र पूजा चल रही है। मंगलवार को नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने मां चंद्रघंटा की आराधना का विशेष महत्व बताया। माता के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप साहस, शक्ति और निर्भयता का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनकी पूजा से भक्तों में आत्मविश्वास बढ़ता है। यह नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं और जीवन में सुख-शांति लाती हैं। माता की कृपा से सकारात्मकता का संचार होता है।
सुदेश कुमार ने कहा कि नवरात्र में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना प्रेरणा देती है। यह भक्तों को धर्म, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। मां चंद्रघंटा की पूजा विशेष रूप से साहस, धैर्य और मानसिक शांति का संदेश देती हैं। श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाकर सभी के कल्याण की कामना की।
इस मौके पर पंडित सुरेश शर्मा, पंडित चंद्रप्रकाश शुक्ला और पंडित रोहित शर्मा शामिल थे। पंडित चेतन शर्मा, पंडित शिवम शर्मा और पंडित मोहित शर्मा ने भी सहयोग किया। इन सभी पंडितों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद