कोरोना की तीसरी लहर अगर आई तो जिले में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी बच्चों के लिए मुसीबत बन सकती है। जिले में 14 वर्ष तक के बच्चों की करीब 9 लाख 91 हजार 800 आबादी पर सिर्फ 147 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। यानी 6746 बच्चों पर एक बालरोग विशेषज्ञ है।
तीसरी लहर से निपटने के लिए एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 100 बेड और जिला अस्पताल में 40 बेड के पीडियाट्रिक इंटेसिंव केयर यूनिट (पीआईसीयू) तैयार किए गए हैं। इनके अलावा 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी 120 बेड के पीआईसीयू तैयार किए गए हैं। मेडिकल में 50 बेड आइसोलेशन वार्ड, 25-25 बेड का आईसीयू और जनरल वार्ड है। यहां 25 वेंटिलेंटर हैं। लेकिन बच्चों की आबादी के मुकाबले यह संसाधन पर्याप्त नहीं हैं।
कर रहे हैं तैयारी
तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा खतरे की आशंका जताई गई थी। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सीएचसी पर बच्चों के लिए वार्ड तैयार करा दिए गए हैं। जरूरत के हिसाब से और भी बदलाव किए जाएंगे। - डॉ. अशोक तालियान, सर्विलांस अधिकारी
अस्थायी चिकित्सकों से की जा रही भरपाई
मेडिकल के प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता ने बताया कि चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए कुछ अस्थायी चिकित्सक रखे गए हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जरी और यूरोलॉजिस्ट ने सुपर स्पेश्यलिटी विंग में ज्वाइन किया है। चिकित्सकों की कमी के संबंध में शासन को अवगत कराया जा चुका है।
जिले में संख्या
स्वास्थ्य विभाग (सीएमओ के अंतर्गत)- 11
मेडिकल कॉलेज 35 (सीनियर व जूनियर रेजिडेंट समेत)
जिला अस्पताल : 04
महिला अस्पताल : 05
निजी चिकित्सक : 92
योग : 147
कैसे हो इलाज और पढ़ाई, मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 44 पद खाली
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 44 चिकित्सा-शिक्षकों की कमी है। इस कारण एमबीबीएस की 50 सीटें भी गंवानी पड़ी हैं। मरीजों को इलाज के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। रेडियो डायग्नोसिस प्रोफेसर डॉ. यासमीन उस्मानी की ड्यूटी सहारनपुर और मेरठ मेडिकल कॉलेज में लगाई गई तो उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों के पद भरने के निर्देश दिए हैं। मेरठ मेडिकल कॉलेज में करीब 1300 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। कॉलेज में सीनियर चिकित्सकों के 184 पदों के मुकाबले 140 चिकित्सक हैं।
मेडिकल से चिकित्सकों का हो रहा मोहभंग
एक तरफ विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा तो दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज से चिकित्सकों के मोहभंग हो रहा है। यहां से पिछले 10 सालों में ही कई विशेषज्ञ चिकित्सक इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज अहमद, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित उपाध्याय, यूरो सर्जन अभिषेक जैन, प्लास्टिक सर्जन भानू प्रताप फिजिशियन अमित माहेश्वरी शामिल हैं।
10 मिनट से कम में मिलेगा इलाज
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का दावा है कि अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चों और किशोरों का इलाज शुरू कराने के लिए 10 मिनट का समय रखा गया है। इसके लिए मेडिकल, जिला अस्पताल, सुभारती, एनसीआर मेडिकल कॉलेज, दौराला, मवाना, हस्तिनापुर और किठौर सीएचसी पर तीन बार मॉक ड्रिल करके व्यवस्थाएं चेक भी की गई हैं।