झाड़ियों में लगे पौधों को सही बताते रहे अफसर
मेरठ। पौधे लगाने के लिए मियावाकि विधि से 30 लाख रुपये खर्च कर एमडीए अपनी वाहवाही लूटने में आगे है। इतनी धनराशि खर्च करने के बाद भी एक भी अधिकारी निरीक्षण के लिए पूरे वर्ष नहीं गया। अमर उजाला पड़ताल में पौधे सूखने की खबर प्रकाशित हुई तो एमडीए उपाध्यक्ष ने एमडीए सचिव और तहसीलदार को निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
सोमवार को एमडीए सचिव प्रवीणा ने तहसीलदार विपिन कुमार के साथ मौका-मुआयना किया, लेकिन सचिव को भी वहां सब कुछ ठीक लगा। झाड़ियों में उगे पौधों को भी एमडीए अधिकारी सही मान रहे हैं। ऐसे में शहर के विकास के प्रति वे कितने संजीदा है, इसका पता तो उनकी कार्यशैली से ही लग रहा है।
एमडीए हर वर्ष 30 से 40 हजार पौधे लगाने के लिए योजना तैयार करता है, लेकिन एक भी स्थान पर कितने पौधे जिंदा बचे, उसका आंकड़ा नहीं है। शताब्दी नगर में जिस स्थान पर पौधे लगाए गए, वहां की स्थिति खराब है। सूखे पौधों का मामला उजागर हुआ तो एमडीए के उद्यान विभाग की नींद टूटी।
सूत्रों के अनुसार पहले सूखे पौधे हटा दिए गए। इसके तीन दिन बाद एमडीए सचिव का निरीक्षण कराया। हाल यह रहा कि जिस गांधी उपवन में औषधीय पौधे लगाने के लिए दो वर्ष पहले सांसद से लेकर शासन स्तर के अधिकारी जुटे रहे। उस स्थल को भी अब तक एमडीए ठीक नहीं कर सका है। अब फिर वन महोत्सव मनाने के लिए एमडीए 40 हजार पौधे लगाने की तैयारी कर रहा है।
---
पांच हजार पौधों का किया था दावा
एमडीए अधिकारी निरीक्षण में सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं। वहीं, मियावाकि विधि से पांच हजार पौधे लगाने का दावा किया गया था। पांच हजार पौधे अगर जिंदा रहते तो वहां का नजारा कुछ और होता। वहीं, एमडीए सचिव के निरीक्षण के समय ही वहां घास काटी जा रही थी। इससे साफ है कि निरीक्षण से पहले ही उद्यान विभाग को अलर्ट कर दिया गया।
--------------
पौधे तो वहां ठीक लग रहे थे। कुछ स्थानों पर घास उगी है, उसके लिए निर्देश दिए गए हैं - प्रवीणा, एमडीए सचिव
--------------