मेरठ में सीएए की हिंसा में नामजद आरोपियों से अब वसूली नहीं होगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। मेरठ में 51 लोगों को 28 लाख रुपये का वसूली नोटिस दिया गया था। जिले के पांच थानों में 23 मुकदमे दर्ज किए गए थे। लिसाड़ीगेट में डिवाइडर तोड़ने के साथ ही दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई थी। पुलिस और प्रशासन ने आरोपियों से वसूली करने के लिए नोटिस दिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वसूली नहीं होगी।
20 दिसंबर 2019 को सीएए को लेकर प्रदेशभर में हिंसा हुई थी। लिसाड़ीगेट में जुमे की नमाज के बाद एक समुदाय के लोगों ने पुलिस पर हमला कर हिंसा कर दी थी। पुलिस प्रशासन की ढीली कार्रवाई के चलते प्रदेश सरकार ने फटकार लगाई थी। इसके बाद पुलिस एक्शन में आ गई है। हिंसा और आगजनी में नष्ट हुई सरकारी संपत्ति की कीमत के तौर पर 28.27 लाख की वसूली के लिये 51 आरोपियों की संपत्ति नीलाम करने का नोटिस दिया गया।
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हालांकि आरोपियों से अभी वसूली नहीं हुई थी। पुलिस के अनुसार हिंसा में उपद्रवियों ने सरकारी और निजी संपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचाया था। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने पुलिस चौकी भी फूंक दी थी। प्रशासन, नगर निगम व अन्य सरकारी विभागों के साथ बैठक के बाद हिंसा में हुई क्षति का आकलन कराया गया था। आरोपियों को वसूली के नोटिस रिसीव कराया गया था।
मुकदमों में 173 बने थे आरोपी
लिसाड़ी गेट क्षेत्र और हापुड़ रोड पर हुई हिंसा पांच लोगों की गोली लगने से मौत हुई थी। इस हिंसा में लिसाड़ी गेट, नौचंदी, ब्रह्मपुरी, मवाना, जानी, सरधना थाने में 23 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें 173 आरोपी नामजद हुए थे। 76 आरोपी जेल भेजे गए थे। एसपी क्राइम को हिंसा के दर्ज मुकदमों की जांच के लिए एसआईटी गठित की। जिसकी विवेचना एसआईटी द्वारा की जा रही है। अधिकांश मुकदमों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है।