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नोटबंदी से हांफा उद्योग, 2017 में GST से जूझते रहे उद्यमी, एक क्लिक में पढ़ें

Thu, 28 Dec 2017 05:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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मेरठ उद्योग - फोटो : अमर उजाला
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साल 2017 व्यापार की दृष्टि से मेरठ के लिए मिलाजुला रहा। यह साल नोटबंदी के साथ ही मुख्य रूप से जीएसटी से जूझता नजर आया। शहर के व्यापारी हों या उद्यमी सभी पहले जहां कई माह तक नोटबंदी से जूझे तो साल के अंत तक जीएसटी को समझने में ही बीत गया। अहम बात ये रही कि इस साल कोई नया उद्योग तो नहीं लगा, लेकिन तमाम झटकों के बावजूद व्यापारी और उद्यमी अपने कारोबार में जमे रहे।
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शुरूआती झटकों के बाद उबरा सर्राफा कारोबार
मेरठ स्वर्ण आभूषणों के लिए देश में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां के कारीगरों द्वारा बनाए आभूषण देश के कोने-कोने तक जाते हैं। पिछले साल नवंबर में नोट बंदी के बाद सर्राफा कारोबार को तगड़ा झटका लगा था। लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था पटरी पर लौटी और सर्राफा कारोबार अपनी रौनक की तरफ लौटता नजर आया।
इस बीच कारोबार ने सोने के आभूषणों के साथ डायमंड ज्वैलरी की तरफ भी कदम बढ़ाए। मेरठ के स्थापित ज्वैलर्स ने नए डिजाइन से व्यापार को नई दिशा देने की कोशिश की, लेकिन कुल मिलाकर यह साल सर्राफा कारोबार के लिए पिछले सालों की तुलना में बेहतर नहीं रहा।
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नोटबंदी से लगा तगड़ा झटका
भगत ज्वैलर्स आकाश मांगलिक ने कहा कि सर्राफा कारोबार मुख्य रूप से कैश पर टिका होता है। नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा नुकसान सर्राफा कारोबार को हुआ। पूरे साल हम लोगों ने काफी प्रयास किए, लेकिन पिछले सालों की तुलना करें तो इस बार व्यापार बहुत कम हुआ।

एवरेज रहा व्यापार
जैना ज्वैलर्स अंकुर जैन ने बताया कि इस साल व्यापार एवरेज ही रहा। नोटबंदी नवंबर 2015 में हुई और उसके बाद करीब पांच माह तक व्यापार कमर ही टूट गई। उसमें भी 50 हजार तक की नगद खरीद की लिमिट ने मामला और ज्यादा बिगाड़ दिया था। इसे वापस लेने के बाद कुछ सुधार हुआ।

बेहतर नहीं रहा यह साल 
स्वर्ण गंगा ज्वैलर्स मुकेश रस्तोगी ने कहा मेरठ में सोने के आभूषण तैयार होते है, जो यूपी सहित दिल्ली, पंजाब आदि के सर्राफा कारोबारी तैयार कराते हैं। लेकिन नोटबंदी के बाद पूरी तरह कारोबार प्रभावित हुआ। कैश का फ्लो कम होने के कारण यह साल बेहतर नहीं रहा।

ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए बेहतर साल

मेरठ उद्योग - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी और जीएसटी के बीच भले ही तमाम व्यापार और उद्योग त्रस्त रहे हों, लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर पर इसका कोई असर नहीं रहा। निजी  वाहनों की खरीद जहां पिछले सालों की तुलना में पहले जैसी ही रही, तो व्यवसायिक वाहनों की बिक्री में इस बार बढ़ोत्तरी हुई।

वर्ष 2017 में चौपहिया और दुपहिया वाहन जमकर बिके। युवाओं के बीच महंगी बाइक के साथ ही स्कूटी आदि का क्रेज रहा। पूरे साल में दुपहिया वाहनों की अच्छी बिक्री हुई। वहींचौपहिया वाहनों की बिक्री भी बेहतर रही, लेकिन इस बार प्रोडक्शन में कुछ कमी आने से कई कंपनी मांग के अनुसार गाड़ियां बाजार में नहीं उतार सकी। बावजूद इसके चौपहिया वाहन वर्ष 2017 में भी खूब बिके।

व्यवसायिक वाहनों की बढ़ी बिक्री
वर्ष 2017 में एनजीटी के आदेश ने व्यवसायिक वाहनों की बिक्री को बढ़ा दिया। दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में 10 साल पुराने वाहनों पर रोक के बाद व्यवसायिक वाहनों की बिक्री बढ़ी। हालांकि विक्रेताओं का कहना है कि 2018 में इस आदेश का पालन जब पूरी तरह होगा तो बिक्री और ज्यादा बढ़ेगी।

विपरीत माहौल में भी जमे रहे उद्योग
वर्ष 2017 औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी बेहतर नहीं रहा। नोटबंदी के बाद जीएसटी के फेर में उद्योग फंस गए। इस कारण पूरे साल इंडस्ट्री जूझती नजर आई।

मेरठ में मुख्य रूप से सूक्ष्म और लघु औद्योगिक इकाईयां हैं। दो हजार से ज्यादा इन औद्योगिक इकाइयों की बात करें तो स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के साथ ही कैंची, बैंड, हैंडलूम, ऑटो स्पेयर पार्ट्स, खेती के सामान, ट्रांसफार्मर, इंजीनियरिंग के तमाम सामानों के साथ ही पब्लिशिंग हाउस है। इन सूक्ष्म और लघु इकाइयों में अधिकतर काम नगदी पर आधारित होता था। कर्मचारियों को वेतन देने के साथ ही छोटे ट्रांसपोर्ट, मजदूरी आदि सभी नगदी पर टिका था। जैसे ही नोटबंदी हुई तो पूरा फ्लो टूट गया। ऐसे में नोटबंदी के बाद करीब चार माह ऐसे गुजरे जिसमें कई औद्योगिक इकाईयां बंद भी हो गईं, जिन्हें दोबारा शुरू करने में काफी मेहनत करनी पड़ी।

जब ये इंडस्ट्री अपने ढर्रे पर वापस लौटी तो जीएसटी लागू हो गया और इसको समझने में छोटे उद्यमियों के पसीने छूट गए। जहां पहले टैक्स शून्य था, वहीं अब यह 5 से 28 प्रतिशत तक जा पहुंचा। टैक्स की कई श्रेणी होने के कारण उद्यमी पूरे साल उसे समझने और रिटर्न भरने के तरीकों से ही जूझते रहे। लेकिन इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अगर कोई नई इंडस्ट्री मेरठ में नहीं लगी तो पुरानी बंद भी नहीं हुई।
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नोटबंदी, जीएसटी ने किया प्रभावित

मेरठ उद्योग - फोटो : अमर उजाला
प्रांतीय उपाध्यक्ष आईआईए पंकज गुप्ता ने बताया कि सूक्ष्म और लघु उद्योग कैश पर ज्यादा आधारित रहते हैं। नोटबंदी और जीएसटी से उद्योग प्रभावित हुआ। पिछले सालों की तुलना में वर्ष 2017 उद्यमियों के लिए बेहतर नहीं रहा। लेकिन आने वाले साल में बेहतर की उम्मीद है।

नया कुछ नहीं मिला
आईआईए मेरठ तनुज रस्तोगी ने बताया कि वर्ष 2017 में उद्योगों को झटके तो बहुत लगे, लेकिन नया कुछ नहीं मिला। उम्मीद थी कि इंडस्ट्रीयल एरिया में ही कुछ विकास के काम हो जाते, लेकिन वह भी नहीं हुए। पूरा साल उम्मीदों में गुजरा, लेकिन उम्मीद पूरी नहीं हुई।

औसत रहा काम
प्रीमियर रबर्स आरके जैन ने कहा मेरी फिटनेस इक्यूपमेंट बनाने की फैक्ट्री है। इस साल काम औसत ही रहा, क्योंकि नोटबंदी से सबसे ज्यादा झटका लगा। लेकिन दो तीन महीने बाद सब रूटीन पर आ गया।

जीएसटी से रहे प्रभावित
एमडी एसजी कंपनी टीएन आनंद ने बताया कि साल 2017 औसत से नीचे रहा है। इसका बड़ा कारण जीएसटी रहा, क्योंकि इसका प्रस्तुतीकरण सही नहीं था। ऐसे हम अपने वेंडरों को जीएसटी की कार्यशाला देने में लगे रहे। लेकिन उम्मीद है कि 2018 निश्चित रुप से बेहतर होगा।

स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को मिला प्रमोशन का मौका
खट्टे मीठे अनुभव केबीच वर्ष 2017 कुछ बेहतर मौकेभी लेकर आया। अंडर 19 फीफा वर्ल्ड कप के प्रमोशन का काम मेरठ के हिस्से में भी आया। मेरठ के बूची स्पोर्ट्स को इसके प्रमोशन के लिए 30 हजार फुटबाल का आर्डर मिला। एक तरफ इतना बड़ा आर्डर और दूसरी तरफ मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का नाम भी इस साल विश्व फलक पर छाया। बूची स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के मालिक चरणजीत भाटिया के अनुसार स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिए यह साल थोड़ा नर्वस भरा रहा, लेकिन कुछ कर गुजरने का मौका भी देकर गया।

वर्ल्ड जूनियर टेबिल टेनिस में मेरठ का ब्रांड
टेबिल टेनिस और जिमनास्टिक का सामान बनाने वाली विश्व प्रसिद्ध कंपनी स्टैग के नाम यह साल उपलब्धियों भरा रहा। इटली में हुई वर्ल्ड जूनियर टेबिल टेनिस प्रतियोगिता स्टैग की टेबल पर ही खेली गई। स्टैग कंपनी के मालिक राकेश कोहली ने बताया कि वर्ष 2017 सितंबर तक नोटबंदी और जीएसटी के कारण स्पोर्ट्स इंडस्ट्री कुछ प्रभावित हुई, लेकिन अक्तूबर से सब सामान्य हो चला है। ऐसे में आने वाला साल बेहतर होगा।

बड़े ब्रांड की पैकेजिंग से बनाई पहचान
शहर में दो ऐसे संयंत्र भी स्थापित हुए, जिन्होंने बड़े ब्रांड की पैकेजिंग से अपनी अलग पहचान बनाई। इनमें इंचौली के पास कोल्ड ड्रिंक बाजार के बड़े नाम कैंपा का उत्पाद बनाकर उसकी पैकेजिंग का प्लांट न केवल स्थापित हुआ, बल्कि मार्केट में तेजी से अपनी पकड़ भी बनाई। वहीं हल्दीराम की पैकेजिंग का प्लांट भी मोहकमपुर में स्थापित हुआ। जहां पर हल्दीराम के कई प्रोडक्ट बनने के साथ पैकिंग का काम चल रहा है।

इंचौली स्थिति हनी ब्रेवरेज प्लांट दो साल पहले ही लगा और कैंपा के प्रोडक्ट तैयार करते हुए उसकी पैकेजिंग को मार्केट में उतारा। नोटबंदी और जीएसटी जैसी तमाम दुश्वारियों के बीच खुद को एक अलग मुकाम पर खड़ा किया। इस कंपनी के प्रबंध निदेशक मनोज गोयल के अनुसार नोटबंदी और जीएसटी से थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन एक-दो महीने में सब कुछ पटरी पर लौट आया। कुल मिलाकर यह साल बेहतर रहा।

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