शास्त्रीनगर में व्यापारी परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई और पुलिस के आला अधिकारी मौके तक पर नहीं पहुंचे। इससे साफ समझा जा सकता है कि पुलिस अफसरों ने इस हाईप्रोफाइल मामले की पटकथा कैसे सुसाइड की तैयार कर ली। चार दिन में पुलिस की जांच पड़ताल चार कदम भी नहीं चली है। पीड़ित परिवार ने इसे हत्या बताते हुए पुलिस के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लेकिन इसके बावजूद भी पुलिस अफसरों की नींद नहीं टूटी है।
बुधवार रात को शास्त्रीनगर में एमपीजीएस से सटे फ्लैट में युवा व्यापारी योगेश वर्मा का शव फंदे पर लटका मिला था, वहीं बेड पर उसकी पत्नी बरखा बत्रा और 12 वर्षीय बेटी सनाया के शव मिले थे। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में इंस्पेक्टर नौचंदी और सीओ सिविल लाइन के अलावा कोई भी उच्च अधिकारी न तो मौके पर पहुंचा। यहां तक कि घटना के अगले दिन भी किसी भी अधिकारी ने घटनास्थल का मुआयना करना और पीड़ित परिवार से मिलना तक मुनासिब नहीं समझा।
इस सनसनीखेज घटना की जांच इंस्पेक्टर नौचंदी एसके राणा कर रहे हैं। मां-बेटी की मौत जहां जहरीले पदार्थ के सेवन से होना बताया गया, तो योगेश की मौत का कारण फांसी लगना बताया गया। तीनों शवों की पोस्टमार्टम प्रक्रिया होने के बाद बिसरा आगरा एफएसएल भेजने की तैयारी है। वहीं, सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग का भी एक्सपर्ट से मिलान नहीं हुआ है।
पिता ने झूठ बताते दावे
पुलिस ने दावा किया था कि योगेश ने परिवार को खुशियां न देने की हताशा में पत्नी और बेटी को जहर देकर खुद फांसी लगा ली थी। जबकि योगेश के पिता शांतिस्वरूप का कहना है कि बेटे के व्यापार में न तो घाटे जैसी बात थी, और न ही कोई आर्थिक तंगी थी।
क्यों नहीं बुलाया डॉग स्क्वाएड
पुलिस वैसे तो हर छोटी-बड़ी घटना में डॉग स्क्वाएड को बुलाती है। क्योंकि अधिकांश मामलों के खुलासे में पुलिस को इससे काफी मदद मिली। लेकिन शास्त्रीनगर में तीन लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने डॉग स्क्वाएड बुलाना तक उचित नहीं समझा। पुलिस ने बिना किसी ठोस जांच के ही इसे सुसाइड केस मान लिया था।
किसका था फ्लैट के पास मिला मोबाइल
योगेश के बड़े भाई हरीश का कहना है कि उनका भाई सुसाइड नहीं कर सकता। इसमें कुछ गहरा राज है, जिसे पुलिस दबाने में लगी है। बतौर हरीश रात में जब वह और पुलिस पहुंची तो फ्लैट के नीचे रास्ते में एक मोबाइल फोन मिला था, जिसे उनके एक रिश्तेदार ने पुलिस को दे दिया था। यदि वह मोबाइल फोन हमारे भाई का था, तो पुलिस को बताना चाहिए था, लेकिन अन्य किसी का है तो उसे क्यों छिपाया गया।