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नए भवन नहीं, दवाओं और डॉक्टरों की दरकार

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नए भवन नहीं, दवाओं और डॉक्टरों की दरकार
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भवन निर्माण के नाम पर स्वास्थ्य विभाग कर रहा पैसे की बर्बादी
देखरेख के अभाव में उपकेंद्र हुए खंडहर, नए भवनों के छोड़े टेंडर
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। तहसील क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की जगह भवन निर्माण पर लाखों रुपये बर्बाद कर रहा है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी है। उप स्वास्थ्य केंद्र के रखरखाव के साथ ही स्टाफ बढ़ाने और दवाएं उपलब्ध कराने पर विभाग का फोकस नहीं है।
क्षेत्र के गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने 27 उपकेंद्र (मातृ एवं शिशु केंद्र) खोले हैं। इनमें 22 केंद्र सरकारी भवनों में चल रहे हैं। जबकि पांच उपकेंद्र किराए के भवनों में संचालित हैं। कुछ केंद्र तो संचालित हो रहे हैं, यहां एएनएम बैठती हैं। कई केंद्र खाली पडे़ हैं। कई जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि सरधना देहात, मढियाई व झिटकरी में उप स्वास्थ्य केंद्र जर्जर हालत में हैं। ये कर्मचारियों के बैठने योग्य भी नहीं हैं।
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सरधना देहात के मोहल्ला इस्लामाबाद में तो शरारती तत्वों ने उप स्वास्थ्य केंद्र के खिड़की दरवाजे तक उखाड़ लिए हैं। केंद्र को शौचालय बना डाला है। कई बार रिपोर्ट दर्ज कराई गई। यहां करीब साढे़ चार लाख रुपये की लागत से उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण बस्ती के बीच में कराए। कुलंजन, कपसाड़ समेत कई जगहों पर बस्ती से बाहर उप स्वास्थ्य केंद्र बने हैं। ये रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चले हैं।
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लोगों का कहना है कि सरकार को नए भवन निर्माण की जरूरत नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की ओर ध्यान देना चाहिए। सरधना ब्लॉक में 12 उपकेंद्रों पर कार्यालय निर्माण कराया जा रहा है। दो साल में जनपद में 128 कार्यालयों का निर्माण कराया जाएगा। पिछले वर्ष 66 व इस वर्ष 62 कार्यालयों का निर्माण जारी है। एक कार्यालय पर करीब साढे़ चार लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
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