मेडिकल से यह विशेषज्ञ भी जा चुके
मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजी (अंतस्रावी) विशेषज्ञ डॉ. केके गुप्ता लखनऊ में डीजी चिकित्सा शिक्षा बन गए हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके अनेजा, गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद त्रिवेदी, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप भारती और यूरोलोजिस्ट डॉ. सुधीर राठी भी अलग-अलग कारणों या स्थानांतरण की वजह से यहां से चले गए हैं।
सरकार की कार्यप्रणाली जिम्मेदार
चिकित्सक दबी जुबान में इसके लिए सरकार की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराते हैं। उनका कहना है कि सरकारी चिकित्सक को उतनी तनख्वाह नहीं मिलती, जितनी प्राइवेट प्रैक्टिस के दौरान उसे इनकम होती है। वह मोटी रकम खर्च कर डॉक्टर बनता है। अब चिकित्सक अगर सरकारी अस्पताल में प्रैक्टिस करते हुए निजी प्रैक्टिस करें तो उसे पकड़े जाने का डर रहता है। न करे तो मनमुताबिक सैलरी नहीं मिलती है।
विधान परिषद में उठाया गया मुद्दा
एमएलसी आशु मलिक ने मेडिकल कॉलेज की बदहाली का मुद्दा विधान परिषद में उठाया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में डेढ़ साल से डायलिसिस की सुविधा बंद है। यहां मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और बागपत जिलों के किडनी के गंभीर रोगी इलाज के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें दिल्ली एम्स या अन्य जगह जाना पड़ता है। नेफ्रोलॉजी विभाग बंद होने के कारण नेफ्रोलॉजिस्ट को किसी अन्य जगह संबद्ध कर दिया गया है।
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