नहाय-खाय के साथ रविवार को छठ महापर्व का शुभारंभ किया गया। लोगों ने घरों में, तालाब और गंगनहर पहुंचकर सुबह स्नान किया। इसके बाद भगवान सूर्य की उपासना के साथ ही छठ व्रत को उठाया। सोमवार शाम को खरना होगा। इसके बाद 36 घंटे के लिए निर्जला व्रत शुरू होगा।
छठ पूजा का महापर्व मुख्त: बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल, झारखंड में प्रमुखता पर मनाया जाता है। हालांकि कुछ समय से छठ पूजा पश्चिम उत्तर प्रदेश में भी मनाया जा रहा है। यदि हम महानगर में छठ पूजा की बात करें तो गगोल, गंगानगर, सोमदत्त सिटी, पल्लवपुरम, जागृति विहार, चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय में बिहार एवं पूर्वांचल के परिवारों ने छठ का त्योहार मनाया। चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस निवासी प्रोफेसर एके चौबे के परिवार में छठ पूजा मनाई गई। इनका कहना है कि यह ऐसा व्रत है जो सभी जगह मनाया जाने लगा है। डॉ. राजेश सिंह का कहना है कि अब तो छठ व्रत को लेकर स्थानीय लोग भी पूजा में साथ खड़े दिखाई देते हैं। यह ऐसा पर्व है। जिसमें लगातार 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखकर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है।
खरना आज होगा
सूर्य उपासना का त्योहार छठ पूजा लगातार चार दिन चलता है। रविवार को छठ पूजा का आरंभ नहाय-खाय के साथ किया गया। सोमवार को खरना होगा। खरना का मतलब मनुष्य के मन का शुद्धिकरण है। व्रत रखने वालों ने नहाय-खाय के दिन एक समय भोजन करके अपने शरीर और मन को शुद्ध करना आरंभ किया। जिसकी पूर्णता अगले दिन खरना पर होगी। इस दिन व्रती शुद्ध अंत:करण से कुलदेवता, सूर्य एवं छठ मैया की पूजा करके गुड़ से बनी खीर का नैवेद्य अर्पित करेंगे। व्रती नए मिट्टी के चूल्हे पर खीर अपने हाथों से बनाते हैं। ईंधन में आम की लकड़ी का प्रयोग करना उत्तम माना जाता है। खरना पूजन के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद परिवार के अन्य लोग प्रसाद लेंगे। अगले दिन संध्या का अर्घ्य और सुबह का अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का परायण कर सकते हैं। खरना के बाद ही 36 घंटे का व्रत शुरू हो जाता है।
वहीं, पल्लवपुरम में छठपूजा पर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय-खाय के रूप में मनाया गया। सबसे पहले घर और रसोई को पवित्र बनाया गया। इसके बाद छठ व्रतियों ने स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत की। छठ पर्व के अवसर पर घर के सभी सदस्यों और स्थानीय निवासियों ने व्रतियों के बाद ही भोजन ग्रहण किया। भोजन के रूप में कद्दू और चावल ग्रहण किया गया। इस दौरान कार्तिकेय मैथिल संरक्षक, ललित पिंडारुच अध्यक्ष, विजय मिश्रा उपाध्यक्ष, कालीचरण संयोजक, संजीव झा, सुनील मिश्रा, परश ठाकुर, रोहित चौधरी, आलोक मिश्रा, आलोक रवि, अजय कर्ण, संजय सिंह, गिरिजानंद झा, दिनकर यादव, राहुल आदि समेत मौजूद रहे। कार्तिक मैथिल ने बताया कि छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।
ऐसे होगा महापर्व
खरना : सोमवार 12 नवंबर
शाम को अर्घ्य : मंगलवार 13 नवंबर
सुबह सवेरे अर्घ्य : बुधवार 14 नवंबर
धूमधाम से मनाया जाएगा पर्व
छठ महापर्व को लेकर पल्लवपुरम की उदय सिटी और डिवाइडर रोड पर भव्य तैयारी चल रही है।