संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मवाना)। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ऐतिहासिक बूढ़ी गंगा के पूर्ण प्रवाह मार्ग और बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन को लेकर गंभीर है। इस मामले में 16 अक्तूबर यानि आज एक महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। करीब 200 वर्ष पुराने ऐतिहासिक नक्शों के अध्ययन से नदी के प्राचीन प्रवाह मार्ग और उसके मूल स्वरूप से जुड़े तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
यह मामला मेरठ निवासी प्रियंक भारती बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य से संबंधित है। उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग और केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने मामले में शपथपत्र दाखिल किए हैं। एनजीटी ने 3 अगस्त 2026 को बूढ़ी गंगा के पूर्ण प्रवाह से जुड़े विषय पर एनएमसीजी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
एनजीटी ने प्रियंक भारती द्वारा प्रस्तुत दो शताब्दी पुराने नक्शों के अध्ययन के निर्देश भी दिए थे। इन नक्शों में दर्ज नदी मार्ग और पुराने भू-भाग की स्थिति का अध्ययन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने भी अधिकरण में शपथपत्र दाखिल किया है। एनएमसीजी ने ऐतिहासिक नक्शों के आधार पर बूढ़ी गंगा के पुराने प्रवाह मार्ग और वर्तमान भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए एक टीम गठित की है। प्रियंक भारती ने बताया कि आगामी सुनवाई में नदी के पूर्ण प्रवाह मार्ग, बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन और ऐतिहासिक नक्शों के अध्ययन से जुड़े पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है।