फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला संवाद: नए ट्रैफिक नियमों पर बेबाकी से बोले शहरवासी, दिए ये सुझाव

Thu, 12 Sep 2019 01:55 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
अमर उजाला संवाद में अपनी राय रखते लोग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद ट्रैफिक नियम तोड़ने पर चालान की फीस कई गुना बढ़ाए जाने से लोग परेशान हैं हालांकि शहर में नए स्लैब से चालान नहीं काटे जा रहे हैं, लेकिन ताबड़तोड़ चेकिंग से लोगों को दिक्कत हो रही है।

विज्ञापन


ट्रैफिक नियमों को तोड़ने पर बढ़ी चालान फीस के मुद्दे पर अमर उजाला ने बुधवार को संवाद किया। लोगों ने बड़ी बेबाकी से सरकार की इस पहल को अच्छा भी बताया और खराब भी। समस्या के समाधान के लिए अपने सुझाव भी दिए।

स्कूलों में लगाए जाए कैंप
सरकार ने नियम तो बना दिया, लेकिन लोगों को क्या दुविधा होंगी यह नहीं सोचा। स्कूल स्तर पर ड्राइविंग लाइसेंस के कैंप लगाए जाएं। डग्गामार बसों से शहर परेशान है। - डॉ. वीर बहादुर सिंह, प्रधानाचार्य, डीएन इंटर कॉलेज 
विज्ञापन

 
पहले सुविधा मिलें
नियम तो सख्त बना दिए, लेकिन हमारी सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। इसके लिए भी सरकार को विचार करना चाहिए। टूटी सड़कों पर दुर्घटना होने पर विभागों की जवाबदेही तय हो। उन पर जुर्माना लगना चाहिए। - डॉ. उमाशंकर प्रसाद, एसोसिएट प्रोफेसर

इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी हो
अवैध रेहड़ों वालों पर सख्ती होनी चाहिए। सुबह 10 बजे से पहले यह सामान ले जा सकें। इसके बाद अगर सड़क पर दिखें तो कार्रवाई होनी चाहिए। चालान करने के लिए इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी होना चाहिए। - रजनीश कौशल, दवा व्यापारी

यह भी पढ़ें: नए ट्रैफिक नियम से मची खलबली, यूपी में दिखने लगा असर, एक महीने बाद तक पहुंची डीएल की वेटिंग

Trending Videos

चालान नहीं कागजात की व्यवस्था करें
जहां पुलिसकर्मी चेकिंग करते है वहां अगर इंश्योरेंस, प्रदूषण और हेलमेट वाले को बैठा दिया जाए तो अच्छा रहेगा। इसके लिए मैं एडीजी से निवेदन करना चाहूंगा। मैं कुछ दिन पहले सिंगापुर गया तो वहां देखा कि ट्रेन, बस आदि वाहनों में कुछ भी खाने पर 25 हजार जुर्माना है। - हरी विश्नोई, क्लब-60 सदस्य

जुर्माने के डर से नियमों का पालन
हम दिल्ली जाते हैं तो वहां नियमों का पालन करते हैं। वहां हमें जुर्माने का डर रहता है। व्यक्ति का जीवन जुर्माने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं। - पिंकी चिन्योटी, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन, अध्यक्ष

संस्कारयुक्त शिक्षा से सुधरेंगे हालात
सजा के भय से अपराध कम नहीं होते हैं। संस्कारयुक्त शिक्षा मिले तो व्यक्ति अपने आप सुधर जाएगा। दंड अच्छा है लेकिन भ्रष्टाचार पर लगाम लगनी चाहिए। - विनेश जैन, डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन, अध्यक्ष

मध्यम वर्ग पर बोझ
सरकार ने जुर्माना बढ़ाकर मध्यम वर्ग पर बोझ डाल दिया है। हम तो अपने बच्चों को हेलमेट के लिए समझाते हैं, लेकिन कभी-कभी बच्चे बिना हेलमेट के वाहन चला लेते हैं। वहीं, बारिश के समय सड़कों की असलियत पता लग जाती है। - सीमा, दीवान पब्लिक स्कूल, अध्यापिका

यह भी पढ़ें: सपा विधायक की गाड़ी पर संदिग्ध नंबर देख सीओ ने मांगे कागजात, तीखी बहस और फिर...

शहर में मिले छूट
शहर की आंतरिक सड़कों पर लोगों को चालान न किया जाए। लोग अपने घर से बाजार या अपने प्रतिष्ठान पर जाते हैं तो उन्हें भी पकड़कर चालान कर दिया जाता है। हां मुख्य सड़क और हाईवे पर सख्ती जरूर करें। - राजकुमार सचदेवा, टीपीनगर

एसआई स्तर का अधिकारी काटे चालान 
नियमानुसार एसआई स्तर का अधिकारी ही चालान काट सकता है। लेकिन शहर में होमगार्ड और ट्रैफिक सिपाही भी लोगों को पकड़कर चालान करने में लगे हैं, जो गलत है। - विकास गांधी, टीपीनगर

कानून के फायदे और नुकसान देखे शासन 
कानून जनहित में ही बनाए जाते हैं। लेकिन शासन और प्रशासन को व्यवहारिकता में उसके अच्छे और बुरे परिणाम देखने चाहिए। बढ़ी चालान फीस से लोगों को डराकर पुलिस उगाही करने में लगी है। - वेदप्रकाश गुप्ता, टीपीनगर
विज्ञापन

सब पर लागू हो एक व्यवस्था 
जब कानून बना है तो यह सब पर एकसमान लागू होना चाहिए। पुलिस लोगों के तो चालान काट रही है, लेकिन खुद वे नियमों का पालन नहीं करते। पूरे शहर में पुलिस वाले बिना हेल्मेट के घूमते देखे जा सकते हैं। - राकेश विज, टीपीनगर

अनुशासन पैदा करता है दंड का भय 
दंड का भय अनुशासन तो पैदा करता है लेकिन इससे होने वाली दिक्कतों पर भी मंथन करना चाहिए। कई मामलों में जुर्माना राशि वाहन की कीमत से ज्यादा हो जाती है। इसके समाधान के लिए विचार होना चाहिए। - राकेश गौड़

जुर्माना राशि कम हो 
चालान की जुर्माना राशि इतनी ज्यादा बढ़ा दी है कि लोग इसे वहन नहीं कर सकते हैं। जनहित में सरकार को इसे कम करना चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिले और वे नियमों को पालन भी कर सके। - अंकित गुप्ता

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें