कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTi
वायरल वीडियो के मामले में न्यू मेरठ अस्पताल का लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी अभी तक इसमें सील नहीं लगाई गई है। शनिवार को डीएम ने इसके आदेश दिए थे। इस मामले में सीएमओ ने कहा कि सील लगाने की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है। स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
मेरठ में शनिवार को दो मिनट 33 सेकेंड का एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में एक व्यक्ति बता रहा था कि ढाई हजार में कोरोना की फर्जी निगेटिव रिपोर्ट बनवा देगा। यह एक सप्ताह तक मान्य होगी। उसे कहीं भी ले जा सकते हैं। किसी को भी दिखा सकते हैं। टेस्ट कराओगे तो पॉजिटिव रिपोर्ट आ सकती है और 14 दिन के लिए इलाज और क्वारंटीन होना पड़ सकता है। यह रिपोर्ट निगेटिव ही आएगी।
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इंस्पेक्टर लिसाड़ीगेट प्रशांत कपिल का कहना है कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोपाल सिंह ने न्यू मेरठ अस्पताल के प्रबंधक शाह आलम के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला का कहना है कि सीएमओ या मजिस्ट्रेट का आदेश मिलेगा तो अस्पताल को सील कर दिया जायेगा। आरोपी पर कार्रवाई की जा रही है।
यह था पूरा मामला
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक वीडियो में हापुड़ रोड स्थित न्यू मेरठ अस्पताल के चिकित्सक का यही दावा था कि रिपोर्ट बन जाएगी, सैंपल की भी जरूरत नहीं, इसके लिए सिर्फ ढाई हजार रुपए देने होंगे और यह रिपोर्ट एक सप्ताह तक मान्य होगी। रिपोर्ट पर प्यारे लाल शर्मा जिला अस्पताल की मुहर भी लगी होगी। सीएमओ के निर्देश पर इस मामले में न्यू मेरठ अस्पताल के प्रबंधक के खिलाफ लिसाड़ी गेट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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