मेरठ कॉलेज में बृहस्पतिवार को आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य नेताजी के जीवन, संघर्ष, विचारों तथा राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को स्मरण करना रहा। कार्यक्रम में नेताजी के मेरठ आगमन और यहां दिए गए उनके प्रेरक भाषणों के बारे में बताया गया।
संगोष्ठी में वक्ता प्रो. नीरज कुमार ने कहा कि 1937 का वर्ष नेताजी के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी वर्ष उनका विवाह ऑस्ट्रिया की नागरिक एमिली से हुआ। उन्होंने नेताजी से जुड़े जापान स्थित रेंकोजी टेंपल के संस्मरण भी साझा किए।
अध्यक्षता मेरठ कॉलेज के सचिव विवेक कुमार गर्ग ने की। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। आजाद हिंद फौज के कर्नल शाहनवाज ढिल्लों कई दिनों तक उनके घर रुके थे। बचपन में उनसे सुनी नेताजी और आजाद हिंद फौज की कहानियां अब भी प्रेरणा देती हैं।
मुख्य वक्ता रहे जीके अग्रवाल ने नेताजी के व्यक्तित्व के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीमार रहते हुए भी नेताजी ने इंडियन सिविल सर्विस की परीक्षा में उत्कृष्ट रैंक प्राप्त की। जब वे आजाद हिंद फौज के संदर्भ में जापान के शासक जनरल तोजो से मिले तो जनरल तोजो उनसे इतने प्रभावित हुए कि कई दिनों तक उनके साथ ही रहे।
उन्होंने बताया कि कोहिमा की विजय के बाद नेताजी ने रानी झांसी रेजिमेंट की महिला सैनिकों के साथ लगभग 40 मील तक पैदल यात्रा की, जो उनके नेतृत्व और समानता के दृष्टिकोण को दर्शाता है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अर्चना ने किया।