फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर कदम पर लापरवाही... जांच रिपोर्ट दे रही गवाही

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। संतोष कुमार की मौत के मामले में हर कदम पर लापरवाही हुई है। इसकी गवाही जांच रिपोर्ट दे रही है। संतोष कुमार की मौत 23 अप्रैल को बाथरूम के फर्श पर गिरने से हो गई थी। लेकिन स्टाफ के सदस्य तीन मई तक परिजनों को जिंदा होने की सूचना देते रहा। मेडिकल से उनकी सिर्फ डेथ समरी (मृत्यु सारांश) मिली। ‘यह घोर लापरवाही, उदासीनता का द्योतक है। इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी है।’यह टिप्पणी कर प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने शासन को रिपोर्ट भेजी है।
विज्ञापन

पहली जांच रिपोर्ट में डॉक्टर और स्टाफ को बचाने की कोशिश की गई थी। दरअसल मरीज को पहले फ्लू ओपीडी में रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, लेकिन पहली रिपोर्ट में वहां से किसी का बयान तक नहीं लिया गया था। कोविड अस्पताल से मरीज के बारे में कोई खास जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। जो रिपोर्ट तैयार की गई थी वह बिना प्रश्नावली की थी, जिस कारण कार्रवाई का निर्धारण ही नहीं हो पा रहा था। मरीज को अज्ञात में भर्ती किया गया था, रिपोर्ट में यह भी नहीं दर्शाया जा रहा था। कोविड अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुधीर राठी से आख्या मांगी गई थी, मगर उन्होंने तब वह उपलब्ध नहीं कराई थी, बाद में दी। साफ निर्देश हैं कि कोविड में किसी भी मरीज को अज्ञात में भर्ती नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद एक पहचान वाले व्यक्ति की मृत्यु की सूचना परिवार वालों को नहीं दी गई। 22 अप्रैल को ही बाथरूम में फर्श पर गिरने के कारण उनकी मौत होना जांच में आया है। इसके बावजूद उनकी मृत्यु की सूचना परिजनों को नहीं दी गई ड्यूटी पर रहे डॉक्टर ने कहा कि वह पहचान नहीं पाया।
शासन कई और पर करेगा कार्रवाई
इस मामले में शासन स्तर से कई और पर निलंबन की कार्रवाई की तलवार और लटकी हुई है। प्राचार्य ने कहा कि मैंने अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। अब शासन को निर्णय लेना है।
विज्ञापन

इन पर हुई कार्रवाई
डॉ सुधीर राठी- कोविड अस्पताल सर्जरी विभाग के प्रभारी से हटाया
डॉ उत्कर्ष- सेवा समाप्त, एक माह का वेतन रोका
डॉ रचना सीनियर रेजिडेंट- सात दिन का वेतन रोका
डॉ अंशु, मैटर्न अनीता, सिस्टर इंचार्ज विक्टोरिया, डेविड, बब्बल और नीलम की एक साल की वेतन वृद्धि रोकी
यह निकला जांच में
जांच के दौरान पता चला है कि संतोष कुमार की दो दिन बाद ही मौत हो गई थी। उस समय संतोष नाम के तीन मरीज भर्ती थे। गलती से दूसरे संतोष नाम के मरीज के बारे में जानकारी दे दी गई थी। डेड बॉडी पैक करते समय बॉडी बैग पर भी स्लिप नहीं लगाई गई थी, जबकि उनकी फाइल पर नाम संतोष लिखा हुआ था। उनके पैर नाम नहीं लिखा था।
सात मई को हुआ था खुलासा
सात मई को संतोष कुमार की बेटी ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर स्टाफ से शिकायत की थी। साथ ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था और मुख्यमंत्री से पिता की तलाश कराने की गुहार लगाई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया था। बताया था कि 21 अप्रैल से मेडिकल कॉलेज कोविड वार्ड में भर्ती थे। 3 मई तक उन्हें बताया गया कि वह भर्ती हैं, लेकिन इसके बाद से उनका कोई पता नहीं है। जांच में सामने आया कि संतोष कुमार का लावारिस में 26-27 अप्रैल को अंतिम संस्कार किया गया था।
मेडिकल में ये हुईं लापरवाही
21 अप्रैल 2021- को मेडिकल में कोरोना पॉजिटिव दो महिला मरीजों के शव बदल गए थे।
6 सितंबर 2020- मेडिकल कॉलेज में दो कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मृत्यु हुई थी। लापरवाही के कारण दोनों शव बदल गए थे और एक शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था। इसी के बाद पारदर्शी पैकिंग शुरू हुई थी।
29 मई 2020 को पांच कोरोना पॉजिटिव मरीजों के ब्लड सैंपल बंदर छीनकर पेड़ पर जा बैठा था।
10 अगस्त 2020- को माइक्रोबायोलॉजी लैब से वीटीएम (वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया) को नष्ट करने के लिए ले जाया जा रहा था। ओवरलोड होने के कारण रिक्शे से पॉलीथिन बैग सड़क पर गिरकर फट गया और वीटीएम बिखर गई थी।
विज्ञापन

जनवरी 2019- शूकर ने एक मृत नवजात को मुंह में ले लिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें