फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जरूरतमंदों से ‘आयुष्मान’ दूर... योजना में खामियां भरपूर

विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरतमंदों से ‘आयुष्मान’ दूर... योजना में खामियां भरपूर
विज्ञापन

मेरठ। ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं जो पात्र होते हुए भी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थी नहीं हैं। इस योजना के लाभार्थियों से लेकर इसके क्रियान्वयन तक में तमाम खामियां हैं। संसद तक में यह मुद्दा गूंज चुका है, पर सुधार नहीं हुआ है। अब खरखौदा ब्लॉक के लोगों ने शिकायत की है, साथ ही केएमसी ग्रुप के चेयरमैन ने भी सोशल मीडिया पर पत्र डालकर योजना में कमियां बताई हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता परशुराम शर्मा का कहना है कि खरखौदा के गांव बमनपुरा मजरा अतराड़ा की आबादी करीब 1400 है। यहां की लगभग 85 प्रतिशत आबादी इस श्रेणी में आती है, लेकिन यहां के लोगों को योजना में शामिल नहीं किया गया है। यह तो बानगी भर है। ऐसे गांव और तमाम लोग हैं जो इस योजना के पात्र हैं, लेकिन वह इसमें शामिल नहीं हैं।
विज्ञापन

केएमसी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि काफी संपन्न लोग योजना में शामिल हो गए हैं, जो अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। वही इसमें इलाज का खर्च काफी कम है, जिस कारण इलाज करने में दिक्कत आती है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मानकों के अनुरूप ही गोल्डन कार्ड बनाया जाएं। स्वास्थ्य अधिकारी प्रेम सिंह और एक भाजपा नेता का नाम आयुष्मान भारत योजना में था। स्वास्थ्य अधिकारी ने अपना गोल्डन कार्ड वापस कर दिया था।
10 लाख से ज्यादा लाभार्थियों के नहीं बन सके गोल्डन कार्ड
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू हुए करीब ढाई साल हो गए हैं, लेकिन अभी भी जिले में 10,38,157 लाभार्थी ऐसे हैं, जिनके गोल्डन कार्ड (आयुष्मान कार्ड) नहीं बने हैं। जिले में कुल 12,55, 915 लोगों के गोल्डन कार्ड बनने थे, जिनमें से अभी तक 2,17,758 के ही गोल्डन कार्ड बन सके हैं। यह करीब 17. 4 प्रतिशत ही है। अब 10 से 24 मार्च तक एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
गोल्डन कार्ड में त्रुटियां
पहले जारी किए गए गोल्डन कार्डों में त्रुटियां हैं। जैसे नाम, जन्म तिथि, माता-पिता का नाम में। इन गलतियों को स्थानीय स्तर पर दूर करने की कोई व्यवस्था नहीं है। लाभार्थियों को नाम-पता इत्यादि सही कराने के लिए जनसुविधा केंद्रों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
30 फीसदी अपात्र योजना में शामिल
आयुष्मान भारत योजना व मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना में पात्रता सूची की जांच कराकर अपात्रों को सूची से हटाने की मांग की जा चुकी है। यह मांग मुख्यमंत्री से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने की थी। उनका कहना था कि 30 फीसदी से अधिक ऐसे लोगों ने कार्ड बनवा लिए हैं, जो पात्र नहीं हैं।
विज्ञापन

शासन को दी है जानकारी
साल 2011 की आर्थिक जनगणना के अनुसार आयुष्मान भारत के लाभार्थियों की सूची शासन स्तर पर तैयार की गई थी। इसमें बदलाव भी शासन स्तर पर ही किया जा सकता है। जो भी कमियां हैं, उनको शासन में अवगत कराया जा चुका है। - डॉ. पूजा शर्मा, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें