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चैत्र नवरात्र: सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग में होंगी कलश स्थापना

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चैत्र नवरात्र : सर्वार्थ सिद्धि योग में होंगी कलश स्थापना, अश्व पर सवार होकर आएंगी माता रानी
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मेरठ। चैत्र मास को हिंदू नववर्ष का प्रथम मास माना गया है। यह धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस नवरात्रि में तीन बार 13,14 और 15 अप्रैल को सर्वार्थ सिद्धि योग और पांच बार 15,16,18,19 और 21 अप्रैल को रवियोग बन रहा है। ये योग इसके महत्व को और बढ़ा रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ था। मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है। इसके अलावा भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम का जन्म भी चैत्र नवरात्र में हुआ था। युगों में प्रथम सत्ययुग का शुभारंभ भी इसी तिथि से हुआ था। शास्त्रानुसार नवरात्र पूजन तथा कलश स्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के पश्चात अथवा अभिजीत मुहूर्त में कर लेनी चाहिए। चैत्र नवरात्र में देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए इनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
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इस नवरात्र पर माता का आगमन घोड़े की सवारी पर हो रहा है। मार्कंडेय पुराण में देवी के नौ रूपों के अवतरण और उनके द्वारा दुष्टों के संहार का पूरा वर्णन है। चैत्र नवरात्र में माता का पाठ करने से देवी दुर्गा का विशेष आशीर्वाद मिलता है। इस बार मंगलवार (13 अप्रैल) को अश्विनी नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है।
चंद्रमा मेष राशि में रहेगा। अमृत सिद्धि योग में कार्य शुरू करने पर शुभ फल मिलता है। साथ ही स्थायित्व की प्राप्ति होती है। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग में जो कार्य होते हैं, वह बिना बाधा के पूर्ण होते हैं। आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि निर्णय सिंधु के अनुसार नवरात्र पूजन द्विस्वभाव लग्न में करना शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मिथुन, कन्या, धनु तथा कुंभ द्विस्वभाव राशि है। अत: इसी लग्न में पूजा प्रारंभ करनी चाहिए। मंगलवार को प्रतिपदा प्रात: 10.17 बजे तक ही रहेगी। इस दिन अश्विनी नक्षत्र होने के कारण सूर्योदय के बाद 10:17 बजे घट स्थापना होगी और अखंड ज्योति जलाई जाएगी।
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- चैत्र नवरात्र घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
- अति उत्तम मुहूर्त - सूर्योदय से सुबह 07:33 बजे तक शुभ चौघड़िया और स्थिर वृषभ लग्न के साथ होगी।
- उत्तम मुहूर्त - द्विस्वभाव लग्न प्रात: 07:35 से 09:50 बजे तक होगा।
- तीसरा मुहूर्त - इस समयावधि में प्रतिपदा तो नहीं होगी। जो भक्त किसी कारणवश प्रात: स्थापना आदि नहीं कर पाएंगे, वे ही इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से 12:42 बजे तक घट स्थापना कर सकते हैं। इस लग्न में पूजा तथा कलश स्थापना कर लेंगे तो शुभ होगी।
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- माता का घोड़े पर आगमन ज्यादा शुभ नहीं
- इस बार चैत्र नवरात्र का आरंभ मंगलवार से हो रहा है। मंगलवार के दिन मां दुर्गा का आगमन घोड़े (अश्व) पर होता है, यह ज्यादा शुभ नहीं है। घोड़े पर मां के आने से भय और युद्ध की स्थिति बनी रहेगी।
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- नवरात्र के प्रथम दिन बनने वाले कुछ शुभ योग
- इस बार नवरात्र के प्रथम दिन कुछ विशेष योग बनेंगे। प्रात:10:17 बजे तक करण बव योग रहेगा। दोपहर बाद 03:16 बजे तक विष्कुंभ योग रहेगा। इसके बाद प्रीति योग शुरू होगा। वहीं रात 11: 31 बजे तक बालव योग रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का प्रभाव भी सूर्योदय से दोपहर 02:19 बजे तक रहेगा।
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