एलिश अंडर-16 कैटेगरी में खेल रही थीं। उन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन से प्रतियोगिता में निर्णायकों और दर्शकों को प्रभावित किया। परिवार और ग्रामीणों में उसकी इस सफलता से खुशी की लहर दौड़ गई।
एलिश के दादा दिमाग सिंह, जो प्रधान राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के प्रबंधक हैं, उन्होंने बताया कि पोती ने पंचकुला में अभ्यास किया और मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने कहा कि एलिश पहले किसी खेल में रुचि नहीं रखती थी, लेकिन कॉलेज स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में जब डायरेक्टर डॉ. राजीव भारद्वाज ने उसे जैवलिन थ्रो में भाग लेने को कहा, तो उसने पहली बार हिस्सा लिया और जीत भी गई। वहीं से खेल के प्रति उसकी रुचि जागी, लेकिन उसने आगे चलकर शॉटपुट को अपना पसंदीदा खेल बना लिया।
एलिश के पिता रणविजय किसान हैं और मां पिंकी व दादी कमलेश गृहिणी हैं। परिवार ने हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया। इससे पहले भी एलिश सैफई में हुई 57वीं यूपी स्टेट एथलेटिक्स अंडर-16 प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। गांव के लोगों ने एलिश को 'स्वर्णपरी' की उपाधि दी और कहा कि अब वह राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने जा रही है।