मेरठ। बुजुर्गों की परवाह के लिए बड़े-बड़े होर्डिंग्स, जिरियाट्रिक केयर वार्ड और अलग से ओपीडी चलाए जाने के प्रचार-प्रसार के बाद भी धरातल पर कुछ नहीं दिख रहा है। इसलिए सरकार के राष्ट्रीय बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल मिशन को ही ‘पलीता’ लग रहा है। अक्तूबर 2017 में इसे चालू होना था, लेकिन अभी तक जिरियाट्रिक वार्ड के लिए स्टाफ ही नहीं मिला है। वार्ड बनकर तैयार है, लेकिन उनमें ताला लगा है। दूसरी तरफ, जिला अस्पताल में बुजुर्गों के लिए अलग से ओपीडी चलाई जानी थी, यह व्यवस्था भी परवान नहीं चढ़ सकी है।
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हो रही धड़ाम
बुजुर्गों की सेहत का ख्याल रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसका प्रचार प्रसार इस तरह भी किया जा रहा है कि ‘वरिष्ठजनों की देखभाल करना हमारी परंपरा व संस्कृति का एक अंग है।’ लेकिन शायद स्वास्थ्य विभाग ही इस परंपरा और संस्कृति पर विश्वास नहीं कर पा रहा है। 10 बेड का जिरियाट्रिक (बुढ़ापा) केयर वार्ड बनकर तैयार है, लेकिन स्टाफ नहीं है। इसके अलावा इलाज के साथ-साथ मनोरंजन और अध्यात्म के लिए म्यूजिक और टीवी भी लगाए जाने की योजना है।
60 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों की होनी है देखभाल
इस वार्ड में 60 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों की देखभाल की जानी है। यह वार्ड राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैयार किया गया है। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजी विभाग के सामने बनी नई बिल्डिंग में प्रथम तल पर इसे बनाया गया है, क्योंकि बुजुर्ग होने के कारण उन्हें सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत आएगी।
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शासन से आना है स्टाफ
जिरियाट्रिक वार्ड के लिए शासन के जरिए 10-12 लोगों का स्टाफ आना है। जैसे ही स्टाफ आएगा, उसे इस वार्ड में तैनात कर दिया जाएगा। वैसे, जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक को कह दिया गया है कि वह इस वार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में है। -डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
जरूरत पड़ने पर कर लेते हैं भर्ती
जिरियाट्रिक वार्ड में जरूरत पड़ने पर बुजुर्ग मरीज को भर्ती कर लेते हैं। तब जिला अस्पताल के स्टाफ की ही ड्यूटी लगा दी जाती है। फिलहाल अलग से ओपीडी नहीं चल रही है। सामान्य ओपीडी में ही वृद्ध मरीज देखे जा रहेहैं। -डॉ. पीकेबंसल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल