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नरेंद्र की शोक सभा बनी सियासी महापंचायत, अपनी ही सरकार को घेरते नजर आए भाजपा नेता

Sun, 29 Apr 2018 09:57 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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नरेंद्र की शोक सभा बनी महापंचायत - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ जनपद के डौरली में रविवार को आयोजित नरेंद्र की शोकसभा एवं महापंचायत पूरी तरह राजनीति का अखाड़ा बन गयी। गुर्जर राजनीति में चल रही वर्चस्व की जंग यहां हावी रही। जिस कारण जहां विपक्षी दलों के गुर्जर नेताओं ने भाजपा सरकार और उसके नेताओं पर जमकर निशाने साधे तो भाजपा के कुछ नेता भी तैश में आकर अपनी ही सरकार को घेरते नजर आए।

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यह था मामला
मवाना पुलिस ने डौरली निवासी नरेंद्र (34) पुत्र मलखान समेत चार लोगों का गाय ले जाने पर गोवध अधिनियम में चालान कर जेल भेज दिया था। जेल में हालत बिगड़ने पर नरेंद्र को मेडिकल अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने मवाना पुलिस पर नरेंद्र को थर्ड डिग्री देने का आरोप लगाया था। एसएसपी ने मवाना इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए थे। वहीं, मवाना पुलिस पर हत्या का केस दर्ज कराने की मांग को लेकर परिजन घर के बाहर अनशन पर बैठ गए थे।

यह हुई महापंचायत
नोएडा, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़ से अधिकांश गुर्जर नेताओं की मौजूदगी से यह महापंचायत गुर्जर राजनीति का केंद्र बन गयी। नेता एक-दूसरे की पार्टी के साथ ही नेताओं की भी बात काटते व आरोप प्रत्यारोप लगाते नजर आए। हालांकि पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग का सभी ने समर्थन किया। महापंचायत में एडीएम सिटी मुकेश चंद ने कहा कि शासन व प्रशासन से परिवार को हरसंभव मदद की जाएगी। वहीं, तीखी नोकझोंक होने पर एसपी देहात राजेश कुमार ने बताया कि शाम तक आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होगी। इस पर महापंचायत के साथ ही नरेंद्र के परिजनों का अनशन भी खत्म कराया गया। रालोद के मंडलाध्यक्ष यशवीर सिंह, जिलाध्यक्ष राहुल देव, रालोद नेता पप्पू गुर्जर, सपा महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी, परविंदर सिंह ईशु, नेहा गौड़, गौरव जमालपुर, सुबोध नागर, भारतवीर गुर्जर, दिनेश गुर्जर, प्रदीप गुर्जर आदि मौजूद रहे। 
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वर्चस्व की जंग में भिड़े
महापंचायत में विधायक अवतार सिंह भड़ाना ने कहा कि हमें न्याय लेने के लिए अपना तरीका बदलना होगा। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से मिलकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराएंगे। इस पर मुखिया गुर्जर ने कहा कि पीड़ित परिवार चार दिनों से अनशन पर बैठा है। लेकिन प्रशासन ने इनकी सुध नहीं ली। इस बीच सपा नेता अतुल प्रधान बोले कि सुमित गुर्जर को भी इंसाफ नहीं मिला तो नरेंद्र के परिवार को ऐसे कैसे इंसाफ मिलेगा। जिस पर अवतार सिंह और अतुल प्रधान के बीच तू तू-मैं मैं के बीच माइक की छीनाझपटी होने लगी। दक्षिण विधायक डा. सोमेंद्र तोमर ने मामला शांत कराया। इसके बाद अवतार सिंह वहां से यह कहकर चले गए कि 24 घंटे में मुख्यमंत्री से समय लेकर 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराऊंगा। नहीं तो विधायक पद से इस्तीफा देकर आंदोलन की राह थाम लूंगा।

पढ़ें : यूपी: थर्ड डिग्री से हुई नरेंद्र गुर्जर की मौत, इंस्पेक्टर समेत तीन सस्पेंड

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भड़ाना ने अफसरों को घेरा

शोक सभा में बोलते अतुल प्रधान - फोटो : अमर उजाला
विधायक अवतार सिंह ने अपनी ही सरकार के अधिकारियों के खिलाफ मुखर होते कहा कि नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर और फरीदाबाद में फर्जी मुठभेड़ में लोग मारे जा रहे हैं। अधिकारी सरकार को बदनाम कर रहे हैं। सुमित गुर्जर का भी फर्जी एनकाउंटर किया गया। 

...जेल पर हमला बोल दूंगा
जिपं. अध्यक्ष कुलविंदर सिंह के पिता मुखिया गुर्जर महापंचायत में विपक्षी दल के नेता की भूमिका में नजर आए। कहा कि यूपी में अफसरशाही हावी हो गयी है। नरेंद्र को फर्जी आरोप लगाकर जेल भेजा गया। अपराध रोकने में नाकाम एसएसपी को तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए। भाजपा विधायक और जिलाध्यक्ष पर भी हमले हो रहे हैं। इस मामले में जो निर्दोष जेल गए हैं, वह 24 घंटे में बाहर आने चाहिए नहीं तो जेल पर हमला बोल दूंगा। 

दोषियों को कराया सस्पेंड  
हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक ने कहा कि नरेंद्र की मौत के बाद एसएसपी से मिलकर आरोपियों को सस्पेंड कराया था। इस मामले में सठला गांव के नावेद ओर अशफाक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। वह आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर पीड़ित परिवार की मदद भी कराएंगे। वहीं, दक्षिण विधायक ने कहा कि वह मृतक परिवार के साथ हैं। दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेंगे। 

अतुल ने की आलोचना 
सपा नेता अतुल प्रधान ने कहा कि भाजपा के विधायक अपने मुख्यमंत्री के इतने करीब नहीं हैं, जितना मैं पूर्व सीएम का रहा। उन्होंने भाजपा सरकार की आलोचना करने के साथ पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मांगी। इस दौरान अतुल ने नरेंद्र के परिवार को 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी। 

बीच में चले गए जिलाध्यक्ष और विधायक 
भाजपा की लगातार आलोचना सुनकर जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा और सिवालखास विधायक जितेंद्र सतवाई महापंचायत से उठकर चले गए। उन्होंने कहा कि शोकसभा को राजनीति का अखाड़ा बना दिया है।

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