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कमेला बंद, फिर कहां हो रहा है पशु कटान

Thu, 11 Feb 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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निगम का कमेला पिछले दो साल से बंद है, लेकिन शहर में मांस लगातार बिक रहा है। नगर निगम मांस विक्रेताओं को लाइसेंस भी बांट रहा है। मांस की बिक्री और निगम प्रशासन की कार्रवाई से साफ है कि शहर में अवैध कमेले चल रहे हैं। इसको लेकर न तो निगम प्रशासन गंभीर है और न ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग। दोनों विभागों ने एनजीटी के आदेशों को भी ठेंगा दिखा दिया है। जबकि पशुओं के खून और अवशेष से भूजल भी दूषित हो रहा है।
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ये है एनजीटी का आदेश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का आदेश है कि स्थानीय प्रशासन के साथ उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) या राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (एसईआईएए) की अनुमति के बाद ही पशु वधशाला चल सकती है। मेरठ में जितने भी कमेले चल रहे हैं उनके पास एनजीटी के आदेश के मुताबिक एक की भी स्वीकृति नहीं है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन ने अवैध कमेलों के बंद कराने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समिति करेगी सर्टिफिकेट जारी
एनजीटी के आदेशानुसार मांस की दुकानें नियमानुसार संचालित कराने के लिए सर्टिफिकेट जारी करने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गठित समिति के पास है। यह समिति तिमाही आधार पर सर्टिफिकेट जारी कर काटे जाने वाले पशुओं की संख्या तय करेगी। साथ ही सफाई और स्वास्थ्य से जुड़े मानकों का पालन कराएगी।
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निगम ने 250 लाइसेंस जारी किए
महानगर में लगभग 500 मांस की दुकानें संचालित हैं। शहर में प्रतिदिन 500-800 पशुओं के मांस की खपत मानी जा रही है। नगर निगम ने लगभग 250 मांस विक्रेताओं को लाइसेंस जारी कर दिए हैं। वहीं जब नगर स्वास्थ्य अधिकारी से पशु कटान पर बात की जाती है तो वह बगले झांकने लगते हैं। साथ ही अवैध कमेलों को बंद कराने का अधिकार प्रदूषण नियंत्रण विभाग के पास होना बताते हैं।

बोर्ड बैठकों में कई बार उठा मुद्दा
शहर के गली मोहल्लों में संचालित 100 से अधिक अवैध मिनी कमेलों से निकल रही गंदगी, प्रदूषण का मुद्दा निगम की बोर्ड बैठक में कई बार हंगामे का कारण बन चुका है। लेकिन नगर निगम प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। पार्षदों ने बोर्ड बैठक में यहां तक कहा था कि पशुओं का खून और मल भूमि में बोर करके नीचे डाला जा रहा है, जिससे भूजल दूषित हो रहा है।
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