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लॉकडाउन: बिहार के मजदूरों ने किया हंगामा, बोले- बस भेजो, नहीं तो पैदल जाने दो

Fri, 15 May 2020 07:17 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

  • क्वारंटीन केंद्र बीआईटी में बिहार के मजदूरों ने किया हंगामा 
  • प्रशासन मजदूरों को उनके घर भेजने का नहीं कर सका इंतजाम
  • बस भेजो, नहीं तो पैदल जाने दो
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श्रमिकों ने किया हंगामा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जगह-जगह रोके जाने और क्वारंटीन केंद्रों में रखे गए मजदूरों का हौसला अब जवाब देने लगा है। प्रशासन ने सड़कों पर पैदल जा रहे श्रमिकों को घर भेजने के लिए बसों का इंतजाम करने का भरोसा देकर रोक तो लिया लेकिन उनके घर जाने की व्यवस्था नहीं की। शुक्रवार को मीरापुर के बीआईटी में रखे बिहार के सैकड़ों श्रमिकों ने हंगामा किया। उनका कहना था कि उन्हें घर जाने के लिए बसें उपलब्ध कराएं, अन्यथा पैदल ही जाने दें। 

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मुजफ्फरनगर के रोहाना में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने पैदल जा रहे श्रमिकों को रोककर क्वारंटीन केंद्रों में भेज दिया है। इससे पहले भी बड़ी तादाद में श्रमिकों को इन केंद्रों में भेजा गया था लेकिन उन्हें घर भेजने का इंतजाम नहीं किया गया। श्रमिक जल्द से जल्द घर जाना चाहते हैं। बीआईटी में बिहार के विभिन्न जिलों के सैकड़ों श्रमिकों ने शुक्रवार को हंगामा किया। बेतिया के रविंद्र कुमार, अवधेश कुमार, मुकेश कुमार एवं कुंदन आदि ने फोन पर बताया कि उत्तर प्रदेश के जिलों के श्रमिकों को तो पुलिस ने यहां से भेज दिया है लेकिन उन्हें नहीं जाने दिया जा रहा। उन्हें खाना भी अच्छा नहीं मिल रहा। सब लोग परेशान हैं। उन्हें बसों से भेजा जाए, नहीं तो वे पैदल ही घरों की ओर चल देंगे। 

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क्वारंटीन अवधि पूरी होने पर 42 को भेजा घर
आर्य कन्या इंटर कॉलेज में क्वारंटीन सेंटर में रखे गए 42 श्रमिकों को अवधि पूरी होने पर घर भेज दिया गया। ये क्षेत्र के ही विभिन्न गांवों के निवासी हैं और पूर्वांचल व छत्तीसगढ़ से आए थे। इसके अलावा आठ अन्य लोगों को सेंटर में भेजा गया है। यहां रखे गए बिहार के मजदूरों को उनके घर भेजने की व्यवस्था शुक्रवार को भी नहीं हो सकी। इन मजदूरों ने घर जाने के लिए हंगामा किया था। 
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सवेरे एक कप चाय, तीन बजे मिला खाना 
भूराहेड़ी के स्कूल में रोके गए बलिया के जयनगर निवासी नौ मजदूरों को उनके घर नहीं भेजा जा सका। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें सवेरे एक-एक कप चाय दी गई थी। इसके बाद दोपहर बाद तीन बजे खाना मिला। अब वे यहां नहीं रहना चाहते। ये लोग मंगलौर में काम करते थे। पुलिस ने इन्हें भूराहेड़ी में रोक दिया था।

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