पंचायत चुनाव की सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 2015 के आधार पर आरक्षण तय हुआ तो प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षण में बदलाव हो सकता है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव की तैयारी में लगे लोगों को झटका लगा है।
वर्ष 2015 के चुनाव में प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों का आरक्षण ग्राम पंचायत को पूरी तरह फ्रेश मानकर हुआ था। इससे पहले का आरक्षण नहीं देखा गया था। जिला पंचायत और बीडीसी में पुरानी प्रक्रिया अपनाई गई थी।
यह भी पढ़ें: मुजफ्फरनगर : फर्जी डिग्रीधारक अध्यापक गिरफ्तार, सात माह से चल रहा था फरार, अब 46 लाख की होगी वसूली
कुछ जनपदों में बड़ी संख्या में गांव निगम और निकायों में शामिल हुए हैं, इन जिलों में परिसीमन भी दोबारा हुआ है। ऐसे में हाईकोर्ट के 2015 के आधार पर आरक्षण करने का सीधा असर पड़ेगा। जनपद में जिला पंचायत और बीडीसी के आरक्षण में बदलाव की उम्मीद कम ही लग रही है।
आरक्षण को गहनता से परखने के बाद ऐसा हो सकता है कि जिले में प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षण में कुछ बदलाव हो जाए। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी में लगे लोगों के लिए हाईकोर्ट का आदेश झटका देने वाला है।
अब लोगों की निगाहें इस बात पर है कि सरकार आरक्षण को लेकर नया क्या करती है। प्रधान के अलावा जिला पंचायत और बीडीसी के आरक्षण में तो बदलाव नहीं किया जा रहा है।