इस घटना के विरोध में 29 अगस्त को खालापार में जुमे की नमाज के बाद मुस्लिमों ने तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा और एसएसपी एससी दूबे को ज्ञापन दिया था। प्रतिक्रिया में हिंदू संगठनों ने सिखेड़ा थाना क्षेत्र के नंगलामंदौड़ में 31 अगस्त और 7 सितंबर 2013 को बड़ी पंचायतें की थी। इन्हीं सभा और पंचायतों में माहौल खराब करने और भड़काऊ भाषण देने के मामलों में भाजपा एवं मुस्लिम नेताओं को आरोपी बनाया गया था। पांच साल से ये सभी मुकदमे विभिन्न अदालतों में चल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दंगे से जुड़े 10 मुकदमों समेत कुल 35 वादों की पत्रावली विशेष वाहक से सोमवार को उच्च न्यायालय इलाहाबाद भेज दी गई है। अब जनप्रतिनिधियों से जुड़े सभी मुकदमों की सुनवाई वहीं होगी।
दंगों के मामलों में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, बिजनौर सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह, गन्ना विकास राज्यमंत्री सुरेश राणा, सरधना विधायक संगीत सोम, बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक, खतौली विधायक विक्रम सैनी, विहिप नेता साध्वी प्राची आदि मुख्य रूप से आरोपी हैं। अन्य मामलों में पूर्व सांसद सईदुज्जमां, कादिर राना, पूर्व विधायक नूरसलीम राना, जमील अहमद, अशोक कंसल, विधायक कपिल देव आदि शामिल हैं। बताते चले कि केंद्र सरकार ने 11 सितंबर को उच्चतम न्यायालय को जानकारी दी कि प्रदेश समेत देश के 11 राज्यों में जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए 12 विशेष अदालतें गठित करने की अधिसूचना जारी की है। उसी कार्रवाई के संदर्भ में इलाहाबाद हाईकोर्ट में बनाई गई विशेष अदालत में मुजफ्फरनगर के दंगशें दस वादों समेत 35 मुकदमों की सुनवाई शुरु होगी।
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