सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी प्रकरण में मुजफ्फरनगर पुलिस को अभी कई तथ्यों का राज उजागर करना हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि ठग गिरोह का सरगना इतना बड़ा खेल अपने तीन साथियों के सहारे नहीं कर सकता। उनकी पीठ के पीछे बड़े अधिकारी हो सकते हैं। सही से जांच की जाए तो इन अधिकारियों के चेहरे से पर्दा उठ सकता है।
थाना सिविल लाइन पुलिस ने सोमवार को मोहम्मद राशिद पुत्र मोहम्मद नत्थू निवासी इंद्रानगर लखनऊ, रोहित पुत्र राजकुमार, निवासी मछली फाटक कालोनी, ठाकुरगंज लखनऊ, लक्खी पांडेय पुत्र आनंद पांडेय निवासी टूडा कॉलोनी, तेज बाग, थाना पीजीआई लखनऊ व अंकित वर्मा पुत्र संतराम वर्मा, निवासी ग्राम करपिया, थाना मंसूरी, बाराबंकी को गिरफ्तार कर सरकारी नौकरी दिलाने वाले गिरोह का खुलासा किया था।
बताया था कि राशिद इस गिरोह का सरगना है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया है। यह अलग है कि पुलिस इस बारे में चुप्पी साधे है, बावजूद इसके पुलिस में दबी जुबान में चर्चा है कि इतने बड़े खेल के पीछे अकेले राशिद व उसके तीन साथी नहीं हो सकते।
पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी करते ही जल्दबाजी में ठगी का राजफाश कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भिजवा दिया, लेकिन कई तथ्य अभी ऐसे बचे है, जिनका जवाब तलाशना बेहद जरूरी हैं।
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