आरोप है कि ग्रामीण की मौत की जानकारी दिए जाने के बावजूद पुलिस ने मोनू को छोड़ने से इंकार करते हुए परिजनों के साथ बदसलूकी करते हुए उन्हें वहां से भगा दिया। इससे क्षुब्ध परिजन गांव लौट आए और हंगामा शुरू कर दिया। बुधवार तड़के 3.30 बजे ग्राम प्रधान संजय को थाने बुलाकर मोनू को उसकी सुपुर्दगी में दे दिया।
उधर, मदनपाल के साथ हुई बदसलूकी व उसकी मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। बुधवार की सुबह ग्रामीणों ने लाश को हाईवे पर रखकर जाम लगाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई व मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़ गए। आखिरकार घंटों हंगामे के बाद दोपहर करीब 12.15 बजे मोनू की तहरीर पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद ही ग्रामीण शांत हुए, जिसके बाद लाश को मोर्चरी भेजा जा सका।
घटनास्थल पर मौजूद नेतागण
इनके खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट
मदनपाल के बेटे मोनू की तहरीर पर इंस्पेक्टर नई मंडी संतोष कुमार सिंह, चौकी प्रभारी गांधीनगर अजय कुमार, सिपाही रतन और आठ-नौ अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। सभी पुलिसकर्मियों को धारा 304-ए, 323, 504, 506 आईपीसी के तहत आरोपी बनाया गया है।
इन्होंने कहा--
एसएसपी सुधीर कुमार सिंह का कहना है कि गांव मखियाली निवासी मोनू पुत्र मदनपाल पंजीकृत गैंग का सदस्य है, जिसके खिलाफ नवंबर 2018 में जिलाबदर की कार्रवाई छह माह के लिए की गई थी। मेरे आदेश पर जिलेभर में जिलाबदर व वांछितों की धरपकड़ के लिए चेकिंग अभियान चलाया गया था, जिसमें नई मंडी पुलिस भी मोनू की धरपकड़ के लिए गई थी। मदनपाल की मौत हार्टअटैक से हुई है, जिसकी पुष्टि उसके परिजन भी कर रहे हैं। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है, जिसकी जांच क्राइम ब्रांच को दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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