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मेरठ : वकील के हत्यारोपी पकड़ से दूर, चार्जशीट भी अधूरी

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मेरठ। वकील मुकेश शर्मा की हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हो गई है। मेडिकल पुलिस फरार हत्यारोपियों को न तो गिरफ्तार कर रही है और न ही जेल में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर पा रही है। इसेे लेकर पीड़ित परिवार में आक्रोश है। उनका आरोप है कि पुलिस जानबूझकर आरोपियों को खुली छूट दे रही है। मेडिकल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने के चलते एसपी ने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी। वह भी हत्या के 90 दिन बाद तक चार्जशीट कोर्ट में दाखिल नहीं कर सकी।
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मेडिकल थानाक्षेत्र के कमालपुर गांव में 16 अक्टूबर 2019 को वकील मुकेश शर्मा की सरेशाम हत्या कर दी गई थी। इसके पीछे करोड़ों रुपये की जमीन का मामला बताया गया। पुलिस ने नासिर, योगेश, ओंकार, फैसल, नौशाद को जेल भेजा, जबकि नामजद चेतन और नारायण अभी तक फरार हैं। इस मामले में जिला बार और मेरठ बार एसोसिएशन के पदाधिकारी तक हंगामा कर चुके हैं। मुकेश शर्मा की आठ बेटियां है, जिसमें पांच अभी अविवाहित है। बेटी रजनी ने मुकदमा दर्ज कराया था। रजनी और उसकी दो बहन इस हत्या में चश्मदीद गवाह हैं। इस वारदात के 90 दिन बीतने के बावजूद भी मेडिकल पुलिस फरार दोनों आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी और न ही चार्जशीट दाखिल कर सकी। फरार आरोपियों को इतनी छूट क्यों दी है, इसको लेकर अलग अलग चर्चाएं है। क्योंकि दोनों आरोपी अभी खुलेआम घूम रहे है। इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न लग रहा है।
इंसाफ मांग रही बेटियां
पिता की हत्या में इंसाफ के लिए बेटियां कोर्ट में लड़ रही हैं। मेडिकल पुलिस की कार्यशैली पर बेटियां पहले ही सवाल उठा चुकी हैं। इसके बाद एसएसपी के निर्देश पर इस मुकदमे की विवेचना थाना पुलिस से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। लेकिन अभी तक उन्होंने भी चार्जशीट नहीं लगाई। पुलिस ने हत्या के मामले में कितने पुख्ता सुबूत जुटाए हैं, इसका पता भी चार्जशीट से लगेगा। पुलिस ने दावा किया था कि हत्या के छह घंटे में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपियों को खुली छूट क्यों?
वकील की हत्या में नामजद आरोपी चेतन और नारायण शर्मा को मुख्य आरोपी बताया गया था। पुलिस का भी दावा था कि जमीन के विवाद में हत्या हुई है। दोनों आरोपियों ने प्रापर्टी डीलर नासिर के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिलाया है। इसके बावजूद भी दोनों नामजद को पुलिस गिरफ्तार कर जेल नहीं भेज रही। दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। बताया गया है कि दोनों आरोपी पुलिस के संपर्क में है।
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समय से पहले दाखिल कर दूंगा चार्जशीट
16 अक्टूबर को हत्या हुई थी। जिस दिन से आरोपियों की गिरफ्तारी लिखा पढ़ी में दर्शाई गई, उसके 90 दिन के अंदर चार्जशीट लगनी तय होती है। आरोपियों की गिरफ्तारी 19 अक्टूबर को दिखाई है। समय पूरा होने से पहले चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दूंगा। -चंद्रप्रकाश कठरिया, इंस्पेक्टर (विवेचक) क्राइम ब्रांच
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पुलिस की रही लापरवाही
वकील की हत्या की विवेचना में पुलिस की लापरवाही शुरू से दिखाई पड़ रही है। दो आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। चार्जशीट कोर्ट में दाखिल नहीं कर सकी। वादी की शिकायत पर विवेचना क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कराई थी। इसके बावजूद भी पुलिस गंभीर नहीं है। -अमित दीक्षित, सीनियर अधिवक्ता वादी पक्ष के वकील
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सुबूत जुटाए जा रहे
हत्या की जांच मेडिकल पुलिस से क्राइम ब्रांच ट्रांसफर हुई थी। पुलिस आरोपियों के खिलाफ सुबूत जुटाकर चार्जशीट निर्धारित समय मेें कोर्ट में दाखिल कर देगी। इस मामले में पुलिस की कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। -रामअर्ज, एसपी क्राइम
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