मेरठ। नगर निगम का खजाना खाली हो चुका है। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्जदार हो चुका निगम फिलहाल एक पुलिया बनवाने की भी हालत में नहीं है। 125 कार्यों के टेंडर बार-बार निकाले जा रहे हैं। लेकिन कोई ठेकेदार लेने को तैयार नहीं हैं। ये नौबत आय से अधिक व्यय और राजस्व वसूली में घोर लापरवाही बरतने के कारण आई है। यदि इस खस्ताहाल स्थिति पर काबू पाने के प्रयास नहीं किए गए तो अगले दो साल तक के लिए शहर का विकास भूल जाइए।
इन मदों से होता है
महानगर में 90 वार्ड हैं। एक साल में हर वार्ड में कम से कम दो-दो करोड़ के काम होना चाहिए। अवस्थापना, 14वें वित्त आयोग, अमृत योजना और बोर्ड फंड से निगम शहर में विकास कार्य कराता है। इन सभी मदों से निगम में सालाना करीब 100 करोड़ रुपये पहुंचते हैं। विधायक, सांसद, महापौर और पार्षदों के प्रस्तावों पर प्रतिवर्ष दो-तीन करोड़ के विकास कार्यों के प्रस्ताव आते हैं। गत वर्षों में बोर्ड फंड में जमा धनराशि से भी अधिक के विकास कार्य करा दिए गए। जिसके चलते निगम कर्जदार होता चला गया।
इनका हुआ कर्जदार
निगम पर ठेकेदारों का 62 करोड़ रुपये बकाया है। लगभग 40 करोड़ रुपये के टेंडर ठेकेदार लेने को तैयार नहीं हैं। उधर, जलकल विभाग, आउट सोर्स कर्मचारियों का भी कई करोड़ रुपये बकाया है। कुल मिलाकर नगर निगम 100 करोड़ से भी अधिक का कर्जदार है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। आय से अधिक खर्च होने के कारण निगम बोर्ड फंड से एक-दो साल में कोई विकास कार्य नहीं हो पाएगा। क्योंकि इसी धनराशि से आउट सोर्स कर्मचारियों को प्रतिमाह वेतन भी दिया जाता है।
तो बढ़ सकते हैं साधन
नगर निगम बोर्ड फंड इकट्ठा करने के लिए हाउस टैक्स, पानी टैक्स, सीवर टैक्स, होर्डिंग किराया, सरकारी दुकान किराया आदि मद हैं। बढ़ती जनसंख्या और शहर के होते विस्तार पर गौर करें तो निगम को प्रतिवर्ष हाउस टैक्स से ही 100 करोड़ की आय होनी चाहिए। लेकिन आय हो रही है 25 से 30 करोड़। कारण है कि अगर सभी भवनों पर हाउस टैक्स लगे और शत प्रतिशत वसूली हो तो निगम की आय 100 करोड़ से भी अधिक पहुंच सकती है।
होर्डिंग पर खजाने की होती है लूट
सड़क किनारे, भवनों की छत और दुकानों के बाहर होर्डिंग की बाढ़ है। होर्डिंग कारोबारी रोजाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। लेकिन ये पैसा निगम के खजाने तक नहीं पहुंच रहा। होर्डिंग के अवैध कारोबार और खजाने के नुकसान को लेकर कई बार निगम बोर्ड बैठक से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ी गयी। लेकिन कुछ होर्डिंग कारोबारियों और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण होर्डिंग से निगम को उचित राजस्व प्राप्ति नहीं हो रही है। अगर निगम उचित दरोें के साथ सभी होर्डिंग और यूनिपोल से किराया वसूली करे तो प्रतिवर्ष निगम कोष में लगभग 20 करोड़ रुपये पहुंच सकता है।
बोर्ड बैठक में रखेंगे प्रस्ताव
नगरायुक्त अरविंद कुमार चौरसिया के अनुसार निगम बोर्ड फंड में धन नहीं है। विकास कार्यों में दिक्कत आ रही है। लेकिन हमने राजस्व बढ़ाने की तैयारी कर ली है। वसूली हो रही है। आगामी बोर्ड बैठक में विकास की गति को लेकर प्रस्ताव रखे जाएंगे। बोर्ड के निर्णयों के अनुरूप विकास कार्य कराने का प्रयास होगा।
अधिकारियों की लापरवाही
महापौर सुनीता वर्मा के अनुसार निगम का खजाना खाली होने का मुख्य कारण अधिकारियों की लापरवाही है। निगम की आय का सबसे बड़ा साधन हाउस टैक्स और होर्डिंग हैं। दोनों पर ही काम नहीं हो रहा है। जनता हाउस टैक्स लगवाना चाहती है, निगम के अधिकारी उनको चक्कर कटवा रहे हैं। अनेकों शिकायत हमारे पास पहुंची है। अवैध होर्डिंग में निगम खजाने की लूट किसी से छुपी नहीं है। निगम के पास एक पुलिया बनवाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। बोर्ड बैठक में जवाब लिया जाएगा।