खरखौदा। राष्ट्रीय राजमार्ग पर कस्बे में बने बाईपास तथा कौल रोड पर बने अंडरपास में पिछले 15 दिन से जलभराव एवं कीचड़ हो गई है। जिससे पिछले 15 दिन से ही रास्ता पूर्ण रूप से बंद है। दो दर्जन गांवों जोड़ने वाले इस रास्ते की वजह से करीब 15 किलोमीटर अधिक चलकर आना जाना पड़ रहा है।
मेरठ-बुलंदशहर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 235 के निर्माण से पहले जो मानचित्र बनाया गया था। उसमें कई बदलाव किए हैं। मेरठ के बुलंदशहर के बीच में जितने भी बाईपास हैं उन पर अंडरपास मौके को देखकर नहीं बनाये गये। अब लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खरखौदा बाईपास पर कौल रोड पर अंडरपास बनाया गया। वहीं इसी रोड पर नगामल शुगर मिल भी है। जिस पर गन्ने के ट्रक व ट्रैक्टर-ट्रॉला भी जाते हैं। वहीं, यह रोड करीब दो दर्जन गांवों को जोड़ती है। एनएचएआई द्वारा इस रोड पर जो अंडरपास दिया गया उसकी ऊंचाई बहुत कम है। गन्ने के सीजन में इस अंडरपास से गन्ने के ट्रक व ट्रॉला नहीं निकल सकेंगे। वहीं, इस अंडरपास के निर्माण के दौरान कंपनी ने कौल-खरखौदा संपर्क मार्ग पर बनी रोड के लेबल से भी अंडरपास को करीब चार फिट और नीचा कर दिया है। बरसात में मिटटी बहकर नीचे अंडरपास में आ गयी। वहीं, बरसात का पानी भी भर गया। यहां पर मध्यम वाहनों का आवागमन पूर्ण रूप से बंद है। जिससे इस रास्ते आने जाने वाले राहगीरों को करीब 15 किलोमीटर अधिक रास्ता तय कर आना जाना पड़ रहा है। दूसरा रास्ता जंगल से होकर गुजरने के कारण दिन छिपने के बाद कार व दो पहिया वाहन पूर्ण रूप से बंद हो जाते हैं। जिस कारण इस रास्ते से आने जाने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सभी अंडरपास मौका देखकर ही बनाये गये हैं। कौल रोड पर अंडरपास पूरी तरह नहीं बन पाया। कांवड़ यात्रा के कारण बाईपास को चालू करना पड़ा। फिर बाद में बरसात होने लगी है। बरसात के बाद उसको डेवलप किया जाएगा। -डीके चतुर्वेदी, परियोजना निदेशक एनएचएआई।