विकास कार्यों की आई धनराशि से मिलेगा नगर निगम कर्मचारियों को वेतन
मेरठ। विकास कार्यों के इंतजार में बैठी जनता के लिए एक मायूसी भरी खबर है। शहर के विकास के लिए सरकार द्वार दिए गए 14वें वित्त की धनराशि से अब नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन भुगतान किया जाएगा। यानि पहले से पिछड़े चल रहे शहर में विकास कार्यों की उम्मीद अब जनता को छोड़नी पड़ेगी। बताया जा रहा है कि सरकार के खजाने में अब कर्मचारियों की तनख्वाह देने का भी पैसा नहीं बचा है।
दरअसल सरकार ने फरवरी माह में नगर निगम को शहर में विकास कार्यों के लिए 14वें वित्त से 32 करोड़ रुपये की राशि दी थी। इस राशि से शहर में नाली-नालों के निर्माण के साथ ही सड़कों का निमार्ण होना था। इसके अलावा कूड़ा उठाने और सीवर सफाई के लिए मशीनों की खरीद की जानी थी, लेकिन नगर निगम अफसरों ने समय रहते विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार नहीं हो पाए थे। अब कोरोना महामारी के चलते सरकार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। जिसके कारण सरकार ने नगर निगम को आदेश जारी कर 14 वित्त की धनराशि से विकास कार्यों की जगह कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन पर खर्च करने की बात कही।
प्रतिमाह 14 करोड़ होता है वेतन पर खर्च
नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारियों के वेतन पर प्रतिमाह लगभग 14 करोड रुपए खर्च होता है। सरकार के आदेश अनुसार 14वें वित आयोग के 32 करोड रुपए से सभी अधिकारी व कर्मचारियों को 2 माह का वेतन ही मिल पाएगा। तीसरे माह का वेतन देने के लिए अन्य मदों से धन खर्च करना होगा।
शासन का आदेश सर्वोपरि
नगर आयुक्त डॉ अरविंद कुमार चौरसिया का कहना है कि शासन का आदेश हमारे लिए सर्वोपरि है। 15वे वित्त आयोग से मिलने वाले धन से शहर का विकास कराया जाएगा।
अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा
महापौर सुनीता वर्मा का कहना है कि निगम अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है कि आज शहर के विकास का पैसा दूसरे मदों में खर्च हो रहा है। मार्च से अब तक निगम अधिकारियों को 8 पत्र लिखे गए लेकिन अधिकारियों ने 14 वित्त के खजाने से होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव भी तैयार नहीं किए। नगर आयुक्त की तरफ से 20 जून को विकास कार्यों के लिए 66 करोड़ के प्रस्तावों की फाइल आई है। इस संबंध में नगर आयुक्त को पत्र भेजकर 14वें वित्त के खजाने की स्थिति की जानकारी ली जाएगी।