मेरठ में कार्यकारिणी चुनाव में धांधली होने का जिम्मेदार भाजपा ने नगर निगम को ठहराया है। भाजपा से बागी बने पार्षद संजय सैनी के प्रस्तावक अनुराधा गुलाठी का सत्यापन निर्धारित समय के बाद स्वीकार करना और मतपत्र को अवैध मानने को भाजपा नेताओं ने साजिश बताया। इस प्रकरण की उच्च स्तर से जांच कराने की मांग राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने की है।
वहीं, बुधवार को निगम के कर्मचारी संघ ने महापौर और नगर आयुक्त को पत्र लिखा है। इसमें कार्यकारिणी के चुनाव प्रक्रिया में दूसरे विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की मांग की है।
निगम की कार्यकारिणी चुनाव में धांधली का आरोप, बागी पार्षद संजय सैनी को 12 वोट मिलने और अधिकृत भाजपा प्रत्याशी सतपाल को कुल 11 वोट मिलने के बाद चुनाव स्थगित होने का मामला ठंडा नहीं हुआ है। चार मतपत्र अवैध बताकर निरस्त होने पर भाजपा के अधिकृत पार्षद सतपाल की हार मानी जा रही है। भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी का कहना कि पार्षदों के प्रस्तावक का सत्यापन करने का समय 1:30 बजे था। पार्षद संजय की प्रस्तावक अनुराधा गुलाठी तीन मिनट (1:33 बजे) देरी से पहुंची। चुनाव अधिकारी ने पर्चा निरस्त नहीं किया है।
भाजपा के अधिकृत पार्षद सतपाल और निरंजन वाल्मीकि के दो मतपत्र जानबूझकर निरस्त किए। मतदान की प्रक्रिया का समय 2:00 से 4:00 बजे रखा गया था। हंगामा होने के बाद 3:30 बजे प्रक्रिया शुरू हुई। इस चुनाव प्रक्रिया में निगम की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न हैं। राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने चुनाव प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाकर उच्च स्तर से जांच कराने की मांग रखी है।
महापौर ने की बैठक, चुनाव की तारीख तय नहीं
महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने मंगलवार रात चुनाव अधिकारी अमित भार्गव और निगम अफसरों के साथ अपने कैंप कार्यालय पर बैठक की। चुनाव प्रकिया को लेकर रात में करीब दो घंटे मंथन भी चला। इस प्रकरण की जानकारी लखनऊ तक भेजने की बात कही हैं। अधिकारियों ने भी प्रमुख सचिव नगर विकास को इससे अवगत कराना बताया। कार्यकारिणी चुनाव कब होगा, इसकी अभी तारीख तय नहीं हुई। महापौर का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। इसका आगे ध्यान रखेंगे। जल्द ही चुनाव की तारीख भी तय करेंगे।
सपा पार्षद कहकशां ने कमिश्नर को लिखा पत्र
सपा पार्षद कहकशां जिशान ने भी कार्यकारिणी चुनाव लड़ा था। इसमें उनको 13 वोट मिली थीं। सपा पार्षद का कहना है कि उनकी जीत की घोषणा निगम ने की लेकिन राजनीतिक दबाव में चुनाव स्थगित कर दिया गया। इसकी कोई जानकारी लिखापढ़ी में निगम ने उनको नहीं दी है। इस प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाए और दोषी निगम अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग पार्षद ने डीएम-कमिश्नर और नगर आयुक्त से की है।