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नेताजी के बयान के बाद अखिलेश के समर्थन में आए ये विधायक, मुलायम के साथ सिर्फ...

Tue, 10 Jan 2017 09:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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सीएम अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम स‌िंह यादव
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मुलायम सिंह यादव के खुद को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताने के बाद जहां कई नेता खुलकर सीएम अखिलेश यादव के साथ हैं तो कई ने चुप्पी साध ली है। वहीं, संगठन के पुराने नेता अब भी सब कुछ ठीक होने के इंतजार में हैं। सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह लगातार इस प्रकरण पर कुछ बोलने से बच रहे हैं तो एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। हालांकि, कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, विधायक गुलाम मोहम्मद और प्रभुदयाल वाल्मीकि समेत कई अन्य नेता अखिलेश यादव के समर्थन में आ चुके हैं।
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सपा नेता कई दिनों से मामले में सुलह का इंतजार कर रहे थे। शिवपाल यादव की लिस्ट में जिले की सातों सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए गए थे। इसमें अखिलेश समर्थक अतुल प्रधान, कैंट से परविंदर सिंह ईशु और शहर से रफीक अंसारी का टिकट काट दिया गया था। इसके बाद अतुल प्रधान ने खुले तौर पर शिवपाल यादव के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया तो अखिलेश की लिस्ट में उन्हें और रफीक अंसारी को ही प्रत्याशी घोषित किया गया। इसके बाद से रफीक भी खुलकर अखिलेश के समर्थन में आ गए। शिवपाल की ओर से पिंटू राणा खुलकर बयान दे रहे हैं तो कैंट से उम्मीदवार बनाई गई आरती अग्रवाल ने भी मुलायम सिंह यादव को ही राष्ट्रीय अध्यक्ष माना है। अयूब अंसारी को अभी सुलह की उम्मीद है और वह मुलायम सिंह और अखिलेश यादव दोनों को ही सम्मानित नेता बता रहे हैं। यह बात और है कि सिवालखास के विधायक गुलाम मोहम्मद ने साफ कहा कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अब अखिलेश यादव हैं और नेताजी संरक्षक हैं। इसमें गुलाम मोहम्मद यह भी जोड़ रहे हैं कि पार्टी के बड़े नेता मुलायम सिंह यादव ही हैं, लेकिन चुनाव अखिलेश के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।

मुस्लिम वोट बैंक की चिंता
सपा में चल रही कलह के बीच पार्टी के स्थानीय नेताओं को मुस्लिम वोटरों की चिंता है। सपा नेताओं का मानना है कि इस प्रकरण में फैसला कुछ भी हो, लेकिन जल्द होना चाहिए। सपा से जुड़े लोगों का मानना है कि मुस्लिम वोटरों के छिटकने का संदेश एक बार चला गया तो उसे रोकना आसान नहीं होगा। खास बात यह है कि मुस्लिम मतों को एकमुश्त अपनी ओर रखने के लिए कांग्रेस समेत दूसरे दलों के साथ आने की आस अब कुछ सपाइयों को भी हो गई है। पार्टी में बड़े स्तर पर चल रहे घमासान के बीच कोई बोलने से इनकार ही कर रहा है।
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जिला कार्यालय पर नजर
पूरे प्रकरण में जिला अध्यक्ष समेत संगठन के स्थानीय नेता लगातार बीच का रास्ता अपना रहे हैं। अधिकांश नेताओं के या तो फोन बंद रहे या फिर अभी भी सब कुछ ठीक होने की बात कह रहे हैं। अहम सवाल यह है कि पार्टी कार्यालय पर किसका कब्जा रहेगा। मेरठ से अधिकांश डेलीगेट अखिलेश यादव के समर्थन में हस्ताक्षर कर चुके हैं।

कहीं सुलह हो गई तो
वैसे तो कई दिग्गज नेता साफतौर पर खेमों में आ गए हैं, लेकिन कई नेताओं की चुप्पी की वजह भी खास है। जिलाध्यक्ष समेत संगठन के नेताओं के अलावा एमएलसी डॉ. सरोजिनी व कुछ अन्य नेता खेमेबंदी से बचना चाहते हैं। इन नेताओं को लगता है कि कहीं बाद में दोनों पक्षों में सुलह हो गई तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में ये नेता किसी पक्ष की बुराई लेने से बच रहे हैं।
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