मेरठ। मुहर्रम के इस महीने के दौरान शिया समुदाय में गम और अकीदत का माहौल है। शोक का यह सिलसिला चेहल्लुम (शहदा-ए-करबला की शहादत के 40वें दिन) तक जारी रहेगा।
शहर की दरगाहों और इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर चल रहा है, जो मुहर्रम के बाद भी चेहल्लुम तक अनवरत चलता रहेगा। अकीदतमंदों का मानना है कि करबला की शहादत का गम केवल दस दिनों तक सीमित नहीं है बल्कि यह वह जज्बा है जो चेहल्लुम तक उनकी यादों को ताजा रखता है।
मजलिसों में मौलाना कर्बला की घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं, जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। अकीदतमंदों के अनुसार, चेहल्लुम के दिन शहर में बड़ी संख्या में मजलिसें होंगी और जुलूस निकालकर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाएगा। तब तक मेरठ के अजादार पूरी तरह से गमगीन माहौल में रहेंगे और इबादत के साथ इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला को याद करते रहेंगे।
मुहर्रम कमेटी के मीडिया प्रभारी अली हैदर रिजवी ने बताया कि मजालिस शोहदाए कर्बला का सिलसिला चेहल्लुम और आठ रबी उल अव्वल तक जारी रहेगा।