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छह माह में महज एक जमीन के लिए एमओयू

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मेरठ। प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल दिल्ली से मेरठ तक रैपिड रेल कॉरिडोर में अधिकारियों और शासन की हीलाहवाली सामने आ रही है। छह माह गुजरने के बावजूद सिर्फ सदर तहसील की जमीन के लिए प्रशासन का एनसीआरटीसी से एमओयू हुआ है। बाकि जमीनों पर प्रशासन फैसला लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में मोदीपुरम तक रैपिड रेल चलाने के लक्ष्य 2025 पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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पिछले कुछ समय से फाइल शासन से अनुमति के बाद प्रशासन के पास पहुुंच जाती है। इसके बावजूद हल नहीं निकल रहा है। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत भैसाली बस अड्डे की कार्यशाला को लेकर है। एमडीए का तर्क है कि अभी तक परिवहन विभाग ने जमीन नहीं मांगी है। हालांकि इस बाबत शासन स्तर पर बैठक में जमीन देने के लिए मौखिक तौर पर विभागों को आपस में सहमति बनाने के लिए कहा था। इसके बावजूद विभाग भी इसके लिए गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
अब शुरू करना होगा काउंटडाउन
मेट्रो प्लाजा से बेगमपुल तक बनाए जाने वाले भूमिगत ट्रैक और तीन स्टेशनों के लिए टेंडर प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। इसके लिए एफकॉन्स ने सबसे कम बोली लगाई थी। टेंडर अवार्ड होते ही समय तय कर दिया जाएगा। इसके बाद कंपनी को तुरंत कार्य शुरू करना होगा। ऐसे में जमीन न मिलने से दिक्कतें शुरू होंगी। अब इस कार्य के लिए काउंटडाउन शुरू होगा।
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1. भैंसाली बस अड्डा - इस अड्डे की 7534 वर्ग मीटर भूमि स्टेशन के लिए जरूरी है। इसके लिए प्रमुख सचिव ने जल्द कार्यशाला को स्थानांतरित करने के लिए जिलाधिकारी से जमीन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। पिछली बैठक में सिर्फ तीन दिन दिए थे परंतु अभी तक मामला हल नहीं हो सका है।
2. जिला पंचायत की जमीन - जिला पंचायत की 600 वर्गमीटर स्थायी और 114.78 वर्गमीटर अस्थायी भूमि की जरूरत है। केसरंगज स्कूल के समीप एनसीआरटीसी को सुरंग के वेंटिलेशन के लिए जमीन की जरूरत है। हालांकि, इस पर जिला पंचायत बोर्ड बैठक में जमीन को सर्किल रेट पर देने की सहमति बनी थी। इसके बावजूद फाइनल प्रक्रिया होना बाकी है।
3. खंड विकास अधिकारी - अमर उजाला सेतु के ठीक नीचे बने खंड विकास कार्यालय में ड्रेन का कार्य किया जाना है। स्थल उपलब्ध न होने के कारण स्थल पर अस्थायी रूप से बीडीओ कार्यालय परिसर स्थित ड्रेन को स्थानांतरित किया जाना है। इस छोटे से कार्य को भी शासन को भेज दिया है।
4. दौराला - यहां रैपिड रेल डिपो के लिए 3.09 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की जानी है। इसके लिए किसानों से वार्ता नहीं हुई है। एनसीआरटीसी अब पहले दुहाई में ही डिपो बनाने का विचार कर रहा है।
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