मां बगलामुखी के प्राकट्य दिवस पर शहर के मंदिरों में विशेष आयोजन हुए। जागृति विहार, साकेत और शास्त्रीनगर के मंदिरों में यज्ञ, कीर्तन और प्रवचन आयोजित किए गए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां बगलामुखी का स्मरण किया और उनकी पूजा अर्चना की।
शास्त्रीनगर में एक विशेष यज्ञ का आयोजन हुआ। यज्ञाचार्य महंत यति मां चेतनानंद सरस्वती ने यज्ञ संपन्न कराया। यज्ञ में श्रद्धा और विधि विधान के साथ तीन प्रकार की आहुतियां दी गईं। इनमें औषधीय, धातु और मिष्टान्न व फल की आहुतियां शामिल थीं। औषधीय आहुतियां शारीरिक एवं मानसिक शुद्धि के लिए अर्पित की गईं। इनमें अश्वगंधा, ब्राह्मी, स्वर्ण भस्म और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियां थीं। स्वर्ण और रजत की धातु आहुतियां समृद्धि का प्रतीक मानी गईं। मिष्टान्न व फल आहुतियां सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए अर्पित की गईं। अंजीर, काजू, किशमिश और केसर जैसे पदार्थ इनमें शामिल थे। मां को नवरत्न भी अर्पित किए गए जो नवग्रहों की कृपा से जुड़े हैं।
यति मां चेतनानंद सरस्वती ने यज्ञ के उद्देश्य बताए। यह यज्ञ सनातन धर्म की रक्षा और जनकल्याण के लिए आयोजित हुआ। इसका लक्ष्य समाज में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखना था। मां पीतांबरा की कृपा से यह संभव हो सके, ऐसी कामना की गई। कार्यक्रम में शोभा कौशिक, दिव्यांनी कौशिक, दिव्य मोहन कौशिक, शिवम रस्तोगी, मीनल गौतम सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अन्य मंदिरों में आयोजन
साकेत स्थित बगलामुखी मंदिर में मां का भव्य श्रंगार हुआ। कमल के फूलों और अन्य देशी-विदेशी फूलों से पूजा अर्चना की गई। सुबह से रात्रि तक मंदिर में विधि विधान से हवन चलता रहा। मंत्रोच्चारण प्रदीप गोस्वामी ने किया और दोपहर में भंडारा हुआ। इस अवसर पर कामेश, हिमांशु, भावना यादव, इंद्रपाल आदि मौजूद रहे। जागृति विहार के बगलामुखी धाम में आचार्य सुरेंद्र नाथ द्विवेदी ने पूजन किया। दोपहर में यहां कीर्तन, आरती और प्रवचन भी हुए।
कैलाश भवन मंदिर में त्रिकुंडीय महायज्ञ
कैलाश भवन मंदिर में त्रिकुंडीय महायज्ञ आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि चेतनानंद गिरी महाराज थे। प्रहलाद नगर श्रीकृष्ण भक्त सेवा समिति ने इस आयोजन को सफल बनाया। सैकड़ों लोगों ने हवन में आहुति दी।