किसान बोले, होना चाहिए सुधार
नागल क्षेत्र के गांव पनियाली कासिमपुर निवासी किसान अर्पित कुमार ने बताया कि उन्होंने 24 अक्तूबर को 50 क्विंटल धान नागल किसान सेवा सहकारी समिति में सरकारी क्रय केंद्र पर बेचा था। लेकिन आज तक बैंक खाते में भुगतान नहीं आया है। भुगतान की प्रक्रिया में सुधार होना चाहिए।
छुटमलपुर क्षेत्र के गांव कमालपुर निवासी किसान विजय उर्फ जोनी राणा ने बताया कि उन्होंने 24 अक्तूबर को अपना 42 क्विंटल धान को रसूलपुर मंडी यार्ड स्थित सरकारी धान क्रय केंद्र पर तुलवाया था। अभी तक बेचे गए धान का भुगतान उनके बैंक खाते में नहीं आया है।
धान क्रय केंद्र ----- 24
धान का रकबा ---- 60 हजार हेेक्टेयर
बासमती धान ----- 48 हजार हेक्टेयर
सामान्य धान ----- 12 हजार हेक्टेयर
क्रय एजेंसियों के पास धनराशि की कोई कमी नहीं है। धान का भुगतान पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से किसान के खाते में भेजा जाता है। तकनीकी और प्रक्रियागत देरी की वजह से भुगतान प्रभावित हो रहा है। जिले में खरीदे गए धान की 82 प्रतिशत धनराशि किसानों के खाते में भेजी जा चुकी है। करीब 18 फीसदी धनराशि किसानों के खाते में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
- प्रिंस चौधरी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।
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