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मिलावट का खेल...आधे से ज्यादा सैंपल फेल

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मेरठ। आखिर खाएं तो क्या। हर वस्तु में मिलावट है। ऐसा हम नहीं, खाद्य सुरक्षा प्रशासन की रिपोर्ट कह रही है। पिछले 12 माह में 470 खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट लखनऊ की प्रयोगशाला से आई है। जिनमें से 264 नमूने फेल हैं, यानी करीब 56 फीसदी। मिठाई और मसालों में खतरनाक रंगों का मिश्रण पाया गया है। इनके खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है, मगर सुधार नहीं हो रहा है।
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बर्फी में चांदी के वर्क की जगह एल्युमिनियम का वर्क मिला है। अनारदाना और हल्दी में मेटानिल येलो नामक खतरनाक रंग की मिलावट मिली है। मिठाई को चमकाने के लिए ज्यादा मात्रा में फूड कलर का इस्तेमाल मिला है। दूध में पानी मिलाया गया था। दूध से मक्खन निकाला हुआ मिला। उसमें स्टैंडर्ड फैट नहीं निकला है। मिल्क केक और मिल्क खोया भी सब स्टैंडर्ड पाए। नमकीन के सैंपल मिस ब्रांड मिले हैं। एफएसडीए ने ये सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट तैयार की गई है।
आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवकुमार ने बताया कि जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए जाते हैं, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलाया जाता है। जिसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और तीन लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। मिस ब्रांड और सब स्टैंडर्ड रिपोर्ट आने पर एडीएम सिटी की कोर्ट में मुकदमा चलता है। जिसमें जुर्माने का प्रावधान है। पिछले 12 माह में एक करोड़ आठ लाख और दो हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है।
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मिलावट से हो सकते हैं गंभीर रोग
फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि मिलावट से गंभीर किस्म के रोग हो सकते हैं। सबसे ज्यादा किडनी को नुकसान पहुंच सकता है और पेट संबंधी कई रोग हो सकते हैं। रंगों की मिलावट और अखाद्य पदार्थों से बने खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। लिहाजा इनसे सावधान रहने की जरूरत है।
आकर्षक बनाने के लिए मिलाए जाते हैं रंग
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि खाद्य पदार्थों में खतरनाक रंगों की मिलावट इसलिए की जाती है, ताकि वे चमकदार और रंगीन लगे। जिससे लोग उन्हें खरीदने केलिए आकर्षित हों।
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