फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घोटाला: जीपीएस रिपोर्ट के बगैर ही डीजल का भुगतान, प्रतिवर्ष होते हैं 12 करोड़ खर्च, पढ़िए खास रिपोर्ट

Fri, 03 Sep 2021 04:40 PM IST
कपिल kapil राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में नगर निगम को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। अमर उजाला की पड़ताल में पाया गया कि शहर में नगर निगम के 100 से अधिक वाहन बिना जीपीएस के ही दौड़ रहे हैं।
विज्ञापन
नगर निगम ऑफिस मेरठ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मेरठ में नगर निगम के 100 से अधिक वाहन बिना जीपीएस के ही चल चल रहे हैं। नगर निगम के वाहनों में डीजल घोटाला उजागर होने के बाद जीपीएस व्यवस्था लागू की गई थी। सवाल उठता है कि क्या अब डीजल की चोरी रुक गई है या निगम के लिए यह गंभीर मामला नहीं रह गया है।

विज्ञापन


प्रतिवर्ष नगर निगम खजाने से डीजल पर 12 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। डीजल चोरी का मामला सामने आने पर पूर्व नगर आयुक्त मनोज चौहान ने सभी गाड़ियों में जीपीएस लगवाए थे। ऐसे वाहनों की संख्या 220 थी, जिसमें लाखों रुपये खर्च हुए थे। गाड़ी के इंजन स्टार्ट होने से दूरी तय करने तक का रिकॉर्ड जीपीएस से मिलता था। इसके बाद नगर निगम को प्रतिवर्ष लाखों रुपये की बचत भी हुई थी। 220 में से अब 80 से 85 जीपीएस लगे वाहनों को कंडम दर्शा दिया गया है। नई 50 कूड़ा गाड़ी, जेसीबी, ट्रैक्टर, पोर्कलेन मशीनों में जीपीएस आज तक नहीं लगाया गया। कुल मिलाकर प्रतिमाह लगभग 100 वाहनों के डीजल खर्च का भुगतान बिना जीपीएस रिपोर्ट के ही हो रहा है।

फरवरी में जीपीएस कंपनी का अनुबंध खत्म
नगर निगम प्रशासन ने गाड़ियों में जीपीएस लगाने और संचालन की जिम्मेदारी दिल्ली की एक कंपनी को दी थी। फरवरी 2021 में कंपनी का अनुबंध खत्म हो गया। नगर निगम ने अभी तक कंपनी को नया कार्य आदेश जारी नहीं किया है।
विज्ञापन


जिस कंपनी ने वाहनों में जीपीएस लगाए थे, उसका कार्यकाल पूरा हो चुका है। जिन वाहनों में जीपीएस नहीं है, उनके लिए नया टेंडर निकाला जाएगा। पहले यह विभाग मेरे पास नहीं था। अब मुझे दिया गया है। सभी वाहनों में शीघ्र जीपीएस की व्यवस्था की जाएगी। - डॉ. गजेंद्र सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें