निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत के मलबे से सात घंटे बाद जिंदा निकला मजदूर भुनेश बृहस्पतिवार को थोड़ा सामान्य हो पाया। मेडिकल कॉलेज में भर्ती भुनेश ने जब आपबीती सुनाई तो उसकी आंखों में खौफ साफ पढ़ा जा सकता था। उसने भावुक होते हुए कहा कि मुझे मोबाइल फोन ने बचा लिया। बजरंग बली ने मुझे नई जिंदगी दी है। भुनेश का सात घंटे का संघर्ष उसी की जुबानी...
लगा जैसे भूकंप आ गया
शाम 5:30 बजे सभी लेबर की छुट्टी हो चुकी थी, लेकिन थोड़ा सा मसाला बचा गया था। उसे लगाने के बाद मैं बाइक लेकर निकलने ही वाला था कि लगा जैसे भूकंप आ गया है। जमीन फटने जा रही है। मैं बाइक छोड़कर बाहर की तरफ भागा ही था कि गिर पड़ा। उलट-पुलट होकर नीचे की तरफ जाने लगा। देखते ही देखते मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया।
20 मिनट बाद होश आया
मलबे में दबने पर मैं बेहोश हो गया था। करीब 20 मिनट बाद होश आया तो चिल्लाने लगा कि भइया बचाओ... पर किसी ने नहीं सुना। मुझे लगा कि मलबा बहुत ज्यादा है, जिससे आवाज बाहर नहीं जा रही है। शाम करीब सात बजे ध्यान आया कि जेब में मोबाइल है। लेकि न, मलबे में कुछ इस तरह दबा था कि साइड से पैंट की किसी भी जेब में हाथ नहीं जा सकता था। अचानक से मैंने गहरी सांस लेते हुए पेट अंदर किया तो पैंट तक हाथ पहुंच गया। ऐसे में सोचा कि अगर पैंट को ऊपर से फाड़ लूं तो मोबाइल निकल जाएगा।
नाखूनों से फाड़ी पैंट
करीब रात 9:15 बजे तक हाथ और नाखूनों से पैंट फाड़ने में लगा रहा। उसके बाद मोबाइल हाथ में आया तो लगा कि अब बजरंग बली मुझे बचाने में मदद कर रहे हैं, लेकिन कॉल की तो उसमें बैलेंस नहीं था। इसके बाद काफी प्रयास के बाद रात 9:55 बजे दूसरी जेब से दूसरा मोबाइल निकाला तो उसकी बैटरी डिस्चार्ज मिली।
जब जान पर बन आए तो...
जब जान पर बन आए तो ऐसे चमत्कार हो जाते हैं, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। मैंने इन विकट हालात में भी जब दोनों मोबाइल फोन के सिम एक्सचेंज करने शुरू किए तो इस अदला-बदली में एक सिम नीचे गिर गया, वो भी जिसमें बैलेंस था। लेकिन, बजरंग बली मेरे साथ थे तो जैसे ही हाथ नीचे घुमाया तो सिम मिल गया और उसे किसी तरह फोन में डाल पाया।
मैं करता रहा कॉल पर कॉल
पहली कॉल मैंने बराबर में ही कांटे वाले को लगायी। मैंने उससे कहा कि भाई मैं मर रहा हूं, मेरे घर वालों को तो बता दो तो उसने मुझे पहचानने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद अपने ठेकेदार कमालू को कॉल की तो चौथी बार में उसकी पत्नी से बात हो पाई, लेकिन कमालू की पत्नी ने कमालू के अस्पताल में भर्ती होने की बात कहकर फोन काट दिया।
भाई और पिता का सहारा
मैंने अपने छोटे भाई राहुल को कॉल की तो उसने तुरंत जवाब दिया। इसके बाद अपने पिता (रामलाल) से बात की। उन्होंने बताया कि बेटे, बाहर मलबा हटाया जा रहा है। पुलिस और तमाम लोग लगे हैं। बस तू थोड़ी देर और रुक। हम सब तुझे बचा लेंगे। इसके बाद मैंने पिता से कहा कि फोन का बैलेंस खत्म हो रहा है और कुछ देर में मैं मर जाऊंगा। प्यास भी लगी है और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। लेकिन, बाहर से तमाम लोग फोन कर साहस बढ़ाते रहे, जिससे मेरा ध्यान बंटा रहा और मैं जिंदगी की जंग जीत गया।