प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि वह रात में ही छात्रावास पहुंचे और प्रथम वर्ष के छात्रों से मिलकर सारा प्रकरण जाना और आरोपी छात्रों पर कार्रवाई किए जाने का आश्वासन देते हुए उन्हें बिना डर के शिक्षणरत रहने को कहा। प्राचार्य ने बताया कि बुधवार को एंटी रैगिंग स्क्वायड ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट एंटी रैगिंग कमेटी को दी तो मामले की गंभीरता को देखकर एंटी रैगिंग कमेटी ने प्राथमिकता से जांच रिपोर्ट उन्हें दी है। कमेटी ने रिपोर्ट में छह छात्रों (एमबीबीएस 2018 के बैच के चार और दो अन्य सीनियर्स) को बिना अनुमति के जूनियर बैच के हॉस्टल में घुसने एवं जूनियर छात्रों से रैगिंग करने का दोषी माना।
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प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार को सभी छह छात्रों को दंड स्वरूप तीन माह के लिए सभी शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित किया। इस दौरान दोषी छात्र न तो कक्षाओं में प्रवेश कर पाएंगे और ना ही छात्रावास में रह पाएंगे। इसके अतिरिक्त छात्रों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। उन्होंने बताया कि दोषी छात्रों के परिजनों को भी कार्रवाई की सूचना दे दी।
रैगिंग प्रकरण में एक और तथ्य सामने आया। मंगलवार की रात में रैगिंग प्रकरण में जांच के बाद 2018 बैच के जो छात्र आरोपी पाए गए हैं, 2018 में सीनियर द्वारा की गई रैगिंग में वह पीड़ित थे।
पिछले सत्र 2018 में एमबीबीएस के सीनियर छात्रों ने 2018 बैच के नए छात्रों के साथ रैगिंग की। रैगिंग में सीनियर छात्रों ने इलेक्ट्रॉनिक सेफ्टी रेजर से 2018 बैच के एक दर्जन से भी अधिक के छात्रों के सिर के बाल काटकर गंजे कर दिए थे। छात्रों से अश्लील गाने और चुटकुले सुनाने को कहा। रैगिंग प्रकरण की जानकारी मिलने पर कॉलेज की तत्कालीन एंटी रैगिंग टीम ने दोषी छात्रों पर कार्रवाई की। अब उन्हीं छात्रों पर जूनियर छात्रों से रैगिंग करने का आरोप लगा है।
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