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मिशन 2019: ‘रनरअप’ फार्मूला बदलेगा कई सीटों की दावेदारी, सपा-बसपा का गठबंधन हुआ तो पलट सकती है बाजी 

Thu, 20 Dec 2018 12:02 PM IST
Dimple Sirohi अमित मुद्गल, अमर उजाला, मेरठ
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सपा, बसपा
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लोकसभा चुनाव 2019 में यदि सपा और बसपा का गठबंधन हुआ तो पश्चिमी यूपी में कई सीटों पर बाजी पलट सकती है। अगर पिछली बार के उम्मीदवारों को ही टिकट दिया गया तो भाजपा के लिए और मुश्किल खड़ी हो सकती है। वेस्ट यूपी की कई अहम सीटों पर किसी के लिए टिकट की राह आसान होगी तो किसी के लिए मुश्किल दिख रही है।
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वर्ष 2019 के चुनावी रण की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। भाजपा के खिलाफ दूसरे दलाें का महागठबंधन होने के तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। सपा बसपा का गठबंधन फाइनल माना जा रहा है। रालोद को भी शामिल करने की बात कही जा रही है।

सीटाें के बंटवारे से लेकर अन्य सभी नीतियों पर चर्चा हो रही है। किस सीट पर किसी पार्टी के दिग्गज को टिकट मिलेगा, इसके लिए फार्मूला लागू करने की बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि पिछले चुनाव में जिस पार्टी का भी उम्मीदवार उपविजेता रहा, वहां उसे ही टिकट दिया जाएगा। ऐसे में कई सीटें उलझ सकती हैं।
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वेस्ट यूपी की कई सीटों पर  यह स्थिति उलझन भरी रहेगी। कई दिग्गजों के दावों को झटका लगेगा। इसके उलट कई महारथी ऐसे भी हैं जिन्हें यह फार्मूला भारी लाभ देगा। मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर भाजपा के राजेेंद्र अग्रवाल जीते थे।

दूसरे स्थान पर बसपा के हाजी शाहिद अखलाक रहे थे। इस फार्मूले के अनुसार यहां इस बार भी टिकट बसपा को ही जाएगा। हालांकि पिछले उपविजेता शाहिद अखलाक इस समय बसपा में नहीं हैं। बिजनौर सीट पर  कुंवर भारतेन्द्र चुनाव जीते और दूसरे स्थान पर सपा के शाहनवाज राणा रहे थे।

बसपा के मलूक नागर तीसरे स्थान पर थे। फार्मूला कहता है कि बिजनौर सीट पर सपा और मेरठ पर बसपा को टिकट मिलना चाहिए। ऐसे में सपा बसपा दोनों के ही दिग्गजों का गणित यहां उल्टा हो जाएगा। मलूक नागर की बिजनौर से दावेदारी नहीं हो पाएगी तो अतुल प्रधान, पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर आदि मेरठ से टिकट की दावेदारी कैसे करेंगे। इस गणित से बसपा के कई दावेदारों में मेरठ से होड़ होगी। योगेश वर्मा, मलूक नागर आदि का दावा मेरठ पर ज्यादा रहेगा।

उधर, बागपत में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर ने 2014 में भाजपा के टिकट पर जीत की पटकथा लिख दी। यहां तो रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह दूसरे स्थान पर भी नहीं रह पाए। दूसरे स्थान पर यहां सपा रही। ऐसे में फार्मूला यहां लागू माना जाए तो टिकट सपा के खाते में जाएगा पर गठबंधन धर्म निभाते हुए ऐसा नहीं होगा। रालोद यदि इस गठबंधन में रहा तो यह तय है कि यह सीट रालोद के ही खाते में जाएगी।
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मुजफ्फरनगर सीट भाजपा के संजीव बालियान ने जीती थी। उपविजेता बसपा के कादिर राणा रहे थे। हालांकि कांग्रेस सपा गठबंधन से कांग्रेस के पंकज अग्रवाल चुनावी मैदान में उतरे थे। फार्मूले के मुताबिक यह सीट पर इस बार सीट बसपा को जानी चाहिए।

सहारनपुर में राघव लखनपाल शर्मा बीजेपी से जीते थे। उपविजेता रहे थे कांग्रेस के इमरान मसूद जो सपा का साथ पाकर चुनावी मैदान में उतरे थे। यहां कांग्रेस अपना दम अलग से इस बार फिर लगाएगी और सपा पिछले आधार पर दावा करेगी।

बसपा के जगदीश राणा तीसरे स्थान पर रहे थे। ऐसे में यहां बसपा भी यह कहते हुए टिकट का दावा करेगी कि कांग्रेस सपा का गठबंधन पिछले चुनाव में होेने के कारण वहां कांग्रेस का प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहा था। हालांकि सपा से यहां जिलाध्यक्ष रुद्रसेन, सपा के दिग्गज नेता रहे रामशरण दास के पुत्र जगपाल सिंह आदि यहां सपा से दावेदार हैं।

नगीना सीट पर भाजपा के यशवंत सिंह जीते थे। उपविजेता सपा के यशवीर सिंह। बसपा तीसरे पर थी। ऐसे में गठबंधन फार्मूला यहां सपा की पैरवी करता है। हालांकि यह रिजर्व सीट है।

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