मेरठ। दिमागी अटैक या स्ट्रोक से सभी को सावधान रहना चाहिए। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है।
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने बताया कि हमारे शरीर में मस्तिष्क और नसों को निरंतर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसकी पूर्ति रक्त की वाहिकाओं द्वारा होती है। जब इन रक्त वाहिकाओं में किसी कारणवश क्षति पहुंचती है तब मस्तिष्क के कुछ हिस्से में ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है, इस तरह दिमाग में ऑक्सीजन की आपूर्ति न होने की वजह से दिल या दिमाग में अटैक या स्ट्रोक हो सकता है।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मोहित कुमार ने बताया कि यदि हाथ पैरों में सुन्नपन, चीटियां दौड़ना, कमजोरी, तुतलाहट, चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना, देखने में कठिनाई, उल्टी या मल निकल जाना, मरीज के हंसने बोलने में परेशानी, हाथ उठाने में परेशानी, बोलने में परेशानी जैसे लक्षण नजर आएं तो ऐसे में तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
इन्हे हो सकता है स्ट्रोक
- मधुमेह, रक्तचाप के मरीज, शराब और तंबाकू का सेवन करने वाले, तनावग्रस्त रहने वाले और मोटापा वाले लोगों को स्ट्रोक का खतरा रहता है।
इलाज
स्ट्रोक होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचे, तुरंत न्यूरोफिजिशियन से मिले, स्टेबल होने पर फिजियोथेरेपी उपचार कराएं।