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‘कागजों तक सिमटीं छोटे उद्योगों की योजनाएं’

Thu, 17 Sep 2015 02:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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प्रदेश और केंद्र सरकार सिर्फ बड़े उद्योगों के लिए योजनाएं बनाती हैं, छोटे उद्योगों की हमेशा अनदेखी होती है। छोटे उद्योगों की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सिमट जाती हैं। इन्हें न तो बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध कराई जा रही हैं और न ही उनके लिए ऋण, टैक्स आदि की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। ऐसे माहौल में कैसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक इन यूपी’ का सपना साकार हो पाएगा। यह बातें बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित एमएसएमई की बैठक में उद्यमियों ने कहीं।
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मेरठ में लघु एवं सूक्ष्म उद्योग की करीब 16 हजार इकाइयां हैं। इनके प्रतिनिधियों की अमर उजाला कार्यालय में परिचर्चा हुई। आईआईए के प्रदेश महासचिव पंकज गुप्ता ने कहा कि हम उद्यमी हैं, उद्योगपति नहीं। हमारे संसाधन सीमित हैं और इसी कारण आय भी सीमित है। हमारे लिए अलग से नीति, कानून और योजनाएं बननी चाहिए। हमारे लिए अलग से मंत्रालय तो बना है, लेकिन वह किसी काम का नहीं है। पंकज गुप्ता ने कहा कि जब तक बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं सुधरेगा, तब तक छोटे उद्योग विकास नहीं कर पाएंगे।

उद्यमियों ने बिजली, कानून व्यवस्था, इंस्पेक्टर राज, टैक्स आदि की तमाम समस्याएं गिनाईं। उद्यमियों ने कहा कि यदि हम नया उद्योग लगाना चाहते हैं तो जमीन लेकर उस पर उद्योग खड़ा करना ही सबसे बड़ी समस्या है। क्याेंकि लैंड यूज चेंज नहीं होता है, उस पर नक्शा स्वीकृत नहीं होता है, बिजली का कनेक्शन नहीं मिलता है। यही नहीं नगर निगम अलग से हाउस टैक्स और वाटर टैक्स का लंबा चौड़ा बिल भेज देता है। उद्यमियों ने प्रधानमंत्री के कौशल विकास मिशन पर भी सवाल उठाया। सभी ने कहा कि एमएसएमई स्किल डेवलपमेंट का सबसे बड़ा केंद्र है।
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प्रधानमंत्री ने इस योजना पर पचास हजार करोड़ का बजट घोषित किया है। ऐसे में उनके छोटे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को यदि इस योजना के तहत एक निश्चित मानदेय केंद्र सरकार सीधे लेबर के खाते में पहुंचाए तो जहां लेबर को लाभ होगा, वहीं लघु उद्योगाें के आर्थिक बोझ में भी कमी आएगी। बैठक में स्थानीय स्तर की समस्याएं भी रखी गईं। इनमें सड़क, नगर निगम के टैक्स, बिजली और कानून व्यवस्था का मुद्दा अहम रहा।

इस मौके पर पंकज गुप्ता, अतुल भूषण गुप्ता, अनुराग अग्रवाल, सुमनेश अग्रवाल, पुनीत मोहन शर्मा, चरणजीत भाटिया, रवि प्रकाश अग्रवाल, जुगल किशोर, एएन मल्होत्रा, वरुण मक्कड़, संजीव गर्ग, अशोक गोयल, राजेंद्र सिंह, अनिल अग्रवाल, अजय गुप्ता, सुरेंद्र कुमार, सुनील शर्मा, राजीव सिंघल, निपुण जैन, अजय अग्रवाल, संजीव मित्तल, अश्विनी गेरा मौजूद रहे।

ये बोले उद्यमी
मेरठ के औद्योगिक विकास के लिए जरूरी है कि यहां एक बड़ी यूनिट लगे। बड़ी यूनिट के आने से कई छोटी यूनिट पनपती हैं। सरकारी टेंडरों में जटिलता को आसान किया जाए। चीन, कोरिया जैसे देशों से सस्ता माल इंपोर्ट कर देश के मैन्यूफेक्चरिंग उद्योगों की कमर तोड़ी जा रही है। - अतुल भूषण गुप्ता, चेयरमैन, आईआईए

मेरठ समेत देश में माइक्रो इकाइयाें की संख्या ज्यादा है। सरकार को चाहिए कि माइक्रो के लिए अलग से नीतियां और योजनाएं बनाई जाएं। इनकी पॉलिसी आसान हो, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग माइक्रो इकाइयों का संचालन कर सकें। इसे बढ़ावा देने के लिए बैंकों से आसानी से और कम दरों पर लोन दिलाया जाए। - पंकज गुप्ता, प्रदेश महासचिव, आईआईए


मेरठ के लिए गर्व की बात है कि दिल्ली रोड स्थित सेतु का नाम श्री अतुल माहेश्वरी सेतु रखा गया है। अमर उजाला ने हमेशा उद्यमियों और औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। दिल्ली रोड के औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।  - एएन मल्होत्रा, उद्यमी

केंद्र व प्रदेश सरकारें बड़े उद्यमियों को सुविधाएं देती हैं। लेकिन, एमएसएमई को सुविधाएं नहीं देते। देश में ऑटोमोबाइल से ज्यादा महंगी दर पर एमएसएमई को लोन दिया जाता है। ऐसे में यहां की एमएसएमई चीन, कोरिया, जापान का मुकाबला कैसे कर सकती है। - रवि प्रकाश अग्रवाल, उद्यमी

उद्यमी 25 वर्ष पहले सरकारी विभागों को जो मांग पत्र देते थे। आज भी वहीं दे रहे हैं। इतने सालों बाद भी उद्यमियों की मांगें पूरी नहीं हो सकी हैं। एमडीए उद्योगों के नक्शे पास नहीं कर रहा है। नगर निगम का 18 सौ करोड़ का बजट है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर कोई खर्च नहीं होता। - अजय गुप्ता, उद्यमी

उद्योगों की समस्याएं दूर करने के लिए उद्योग बंधु की बैठक होती है। यह जिला, मंडल और स्टेट लेवल पर होती है। लेकिन इस बैठक का अब कोई औचित्य नहीं है। इसमें जो भी समस्याएं उठाई जाती है, उनका कोई निस्तारण नहीं होता। बागपत रोड व भोला रोड पर दबंग उद्यमियों से वसूली करते हैं। - अशोक गोयल, उद्यमी

मेरठ बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। यहां विभिन्न उत्पादों की इकाइयां संचालित हैं। लेकिन, यहां मशीनों की टेस्टिंग नहीं हो पाती। यहां एक टेस्टिंग सेंटर खोला जाए, ताकि उद्यमियों को फायदा हो सके। यहां मशीन डेवलपमेंट का भी सेंटर बनाए जाए। कर्मचारियों से ज्यादा ओवर टाइम नहीं करा सकते। - वरुण मक्कड़, उद्यमी

मेरठ में बेहतर इन्फ्रास्ट्रेक्चर नहीं है। यहां 40 साल पहले स्पोर्ट्स उद्यमियों के लिए स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाया था। जहां मात्र 28 यूनिट है। इसके बाद लगातार स्पोर्ट्स उद्यमी स्पोर्ट्स कलस्टर की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं किया गया है। - पुनीत शर्मा, अध्यक्ष, ऑल इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स एंड मैन्यूफेक्चरर

मेरठ के इंडस्ट्रियल क्षेत्रों की खस्ता हालत है। यहां की सड़कें टूटी हैं। बुनियादी सुविधा नहीं हैं। यहां पर मात्र एक पीपीडीसी सेंटर है, इसकी मशीनें काम नहीं करती। ऐसे में उद्यमियों को इस सेंटर का कोई फायदा नहीं है। दिल्ली रोड स्थित रेलवे क्रासिंग को बंद न किया जाए, इससे बड़ा नुकसान होगा। - संजीव गर्ग, उद्यमी

मेरठ स्पोर्ट्स नगरी है। यहां के बल्ले से देश समेत विदेशी खिलाड़ी रनों की बौछार करते हैं। फिर भी उद्यमी कश्मीरी विलो के लिए परेशान रहते हैं। 60 साल से सरकार इस मुद्दे को नहीं सुलझा पाई है। उद्यमियों को विदेश से इंग्लिश विलो आसानी से मिल जाती है, लेकिन अपने देश से ही कश्मीरी विलो नहीं मिलती। - सुमनेश अग्रवाल, उद्यमी
 
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अन्य प्रदेशों में जाकर इनवेस्टरों से बात करते हैं, जबकि अपने प्रदेश में चल रहे उद्योगों की खस्ता हालत पर विचार नहीं करते। प्रदेश में भी काफी इनवेस्टर हैं। इन्हें प्रोत्साहित करके औद्योगिक क्षेत्र विकसित क्यों नहीं किए जाते। अनुराग अग्रवाल, सेक्रेटरी, आईआईए

मेरठ के उद्यमी खूब टैक्स देते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलती हैं। नगर निगम जरूरत से ज्यादा टैक्स लगाकर भेज रहा है। लेकिन कोई भी अधिकारी उद्यमियों की सुनने को तैयार नहीं है। ऐसे में मेरठ समेत प्रदेश से उद्यमी पलायन को मजबूर हैं। - जुगल किशोर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, आईआईए

सरकार द्वारा इंपोर्ट को आसान बनाने से अपने यहां के मैन्यूफेक्चरर्स को ही संकट में डाल दिया है। सुविधाओं के अभाव में यहां उद्यमी अपने बल पर उत्पाद निर्मित कर रहा है। सरकार को चाहिए कि उद्यमियों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराए। जीएसटी जल्द लागू करे, ताकि उद्यमी विभिन्न विंडो की जगह एक जगह ही टैक्स पे कर सकें। - अनिल अग्रवाल, उद्यमी

मेरठ में स्पोर्ट्स इंडस्ट्री सियालकोट से आने वालों ने स्थापित की थी। उन्होंने ही जूते बनाने वालों को फुटबाल बनानी सिखाई थी। मेरठ में स्किल डेवलपमेंट पर पहले से काम हो रहा है। सरकार को चाहिए कि माइक्रो इंटरप्राइजेज को प्रोत्साहित करे और इनके यहां काम करने वालों को स्किल डेवलपमेंट से जोड़े। - सुरेंद्र चड्ढा शर्मा, उद्यमी

सरकार उद्योगों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराए। सरकार स्किल डेवलपमेंट पर खर्च कर रही है, ये अच्छी बात है। लेकिन छोटी इकाइयां भी कर्मचारियों को काम सिखाती हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि छोटी इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाए। - निपुण जैन, उद्यमी

मेरठ के औद्योगिक क्षेत्रों की हालत खस्ता है। यहां टूटी सड़कें हैं, स्ट्रीट लाइट नहीं जलती हैं। कई जगह स्ट्रीट लाइट लगी भी नहीं हैं। दिल्ली रोड का नाला भरने से औद्योगिक क्षेत्रों और इकाइयों में पानी भरता है। यहां के उद्यमी टैक्स देते हैं। इसके बाद भी समस्याओं का अंबार है। - अजय अग्रवाल, उद्यमी
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ये हैं मांगें
क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट (सीजीटी) एमएसएमई की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ की जाए।
लेबर लॉ को आसान बनाते हुए स्माल फैक्ट्री बिल लागू किया जाए।
एमएसएमई को एग्रीकल्चर की तरह अलग सेक्टर बनाकर आयकर में छूट दी जाए।
एमएसएमई कुशल कारीगरों से जूझ रही है। ऐसे में केंद्र सरकार को स्किल डेवलपमेंट को बेहतर बनाकर कुशल कारीगर तैयार कराए जाएं।
जल्द गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू किया जाए।
एमएसएमई को मिनिमम आल्टरनेट टैक्स (एमएटी) से मुक्त किया जाए।
कुछ स्पोर्ट्स गुड्स पर एक अप्रैल 2011 में लागू की गई एक्साइज ड्यूटी खत्म हो।
मैन्यूफेक्चर को तीन करोड़ और ट्रेडर्स को छह करोड़ की छूट हो।
क्रिकेट बैट बनाने वाली कश्मीरी विलो से प्रतिबंध खत्म हो।
कानूनी जटिलता को सरल किया जाए।
स्किल डेवलपमेंट में छोटी इकाइयों को शामिल करें।


ये है स्थानीय मांगें
औद्योगिक क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाए।
दिल्ली समेत बड़े शहरों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी हो।
औद्योगिक क्षेत्रों समेत आधारभूत ढांचा (सड़क, ट्रांसपोर्ट व्यवस्था, नाली, खड़ंजे, सफाई, सीवरेज व्यवस्था, जलापूर्ति) मजबूत हो।
रियायती दरों पर स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को भूमि उपलब्ध कराई जाए।
मेरठ में स्पोर्ट्स क्लस्टर बनाया जाए।
लॉ एंड आर्डर सुधारा जाए।
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