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आरक्षण की तस्वीर साफ, अब मैदान में ‘वार’

Thu, 17 Sep 2015 02:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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पंचायत चुनाव के आरक्षण की अंतिम सूचना जारी होने के साथ ही प्रत्याशियों की तस्वीर भी साफ होना शुरू हो गई है। 21 सितंबर तक क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदारों की तस्वीर जहां लगभग साफ हो जाएगी, वहीं अधिसूचना जारी होते ही दावेदार खुलकर मैदान में आ जाएंगे।
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फिलहाल चुनाव लड़ने के उत्सुक लोगों ने जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है। प्रशासन ने आपत्तियों को खारिज करते हुए मंगलवार रात ही फाइनल सूची जारी कर दी। समाचार पत्रों में अंतिम सूची को देखकर दावेदार भी सक्रिय हो गए। कई दावेदार प्रिंटिंग प्रेस पर अपने फोटो युक्त प्रचार सामग्री भी प्रकाशन के लिए देते नजर आए।

भाजपा पंचायत चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है। लगातार प्रदेश नेतृत्व पर जा रही शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए प्रत्याशी चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता बरतने के उद्देश्य से पार्टी नेतृत्व ने बाहरी प्रभारी तैनात किए हैं। मेरठ में गाजियाबाद के पूर्व जिलाध्यक्ष आशू वर्मा को जिला प्रभारी बनाया गया है।
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पंचायत चुनाव के लिए पहले पूर्व मंत्री जयपाल गुर्जर के पुत्र प्रताप गुर्जर को जिला प्रभारी बनाया गया था। उनके साथ जिला अध्यक्ष और जिला महामंत्री को कोर कमेटी में शामिल कर प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन अब प्रत्याशी चयन के  साथ ही चुनाव संचालन के लिए गाजियाबाद के पूर्व जिलाध्यक्ष आशू वर्मा को प्रभारी बनाया गया है। आशू वर्मा को जिला कमेटी अपना सहयोग देगी, लेकिन जिला प्रभारी को अपनी व्यक्तिगत फीड बैक पर प्रत्याशी चयन का अधिकार होगा। भाजपा करीब दो माह से पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटी है।

अनंतिम सूची जारी हुए भी एक सप्ताह हो चुका है। अनंतिम सूची जारी होने के बाद यह तय हो चुका था कि आरक्षण में फेरबदल लगभग असंभव है। बावजूद इसके अभी तक एक भी वार्ड में भाजपा अपने प्रत्याशी का नाम घोषित नहीं कर पाई है। उल्टे प्रत्याशी चयन के बजाए एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था।

लोकल चुनाव में अनुशासन की होगी अग्नि परीक्षा
मेरठ। लोकसभा और विधानसभा चुनाव तक में प्रमुख राजनीतिक दलों का अनुशासन बिगड़ता रहा है। ऐसे में लोकल चुनाव पर अनुशासन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगा। पूर्व की स्थिति पर अगर नजर डालें तो नगर निगम चुनाव में भाजपा के करीब तीन दर्जन कार्यकर्ता बागी हो गए थे। ऐसे में पंचायत चुनाव में इसकी संख्या में इजाफा होने की बात पार्टी के लोग स्वीकार कर रहे हैं। लेकिन पार्टी नेतृत्व अनुशासन को बेस मानकर चलते हुए इसे बनाए रखने की चुनौती स्वीकार कर रहा है।

पंचायत चुनाव में प्रत्येक वार्ड से भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है। क्योंकि कई-कई दावेदार अपना आवेदन दे चुके हैं। ऐसेे में किसी एक को प्रत्याशी बनाना और बाकी को उसके पक्ष में चुनाव न लड़ने और जीत के लिए चुनाव अभियान में लगाना बड़ी चुनौती होगा। हालांकि चर्चा है कि प्रत्याशी चयन से पहले ही कई वार्ड में घमासान शुरू हो चुका है। वार्ड 14 में स्थिति यह है कि एक तरफ जहां बिल्डर पंकज की पत्नी ज्योति भाजपा से दावेदारी करते हुए प्रचार में जुट गई हैं, वहीं भाजपा जिला समिति के ही कुछ लोग एक युवती को प्रत्याशी बनाने की तैयारी में जुटे हैं और प्रचार करा रहे हैं।

सपा ने किया किनारा
पार्टी में अंतर्कलह न हो, इससे बचने के लिए समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी चयन से किनारा कर लिया है। समाजवादी पार्टी ने सभी को चुनाव लड़ने की छूट दे दी है। कोई भी कार्यकर्ता कहीं से चुनाव लड़ सकता है। पार्टी का मानना है कि जो भी जीत कर आएगा, वह पार्टी का ही विजयी उम्मीदवार होगा। लेकिन यदि किसी एक को चुनाव लड़ाने का पार्टी फरमान जारी करती है तो बाकी कार्यकर्ताओं में नाराजगी आ सकती है। इससे एक तरफ जहां पार्टी समर्थित प्रत्याशी को नुकसान होगा, वहीं आगे जाकर विधानसभा चुनाव में भी नुकसान हो सकता है।

अंतिम चार वार्ड नहीं हैं नये वार्ड
मेरठ। आरक्षण की अंतिम सूची जारी करने के बाद जिलाधिकारी ने आरक्षण को लेकर उठे सवाल और विवादों पर सफाई दी है। जिलाधिकारी ने कहा कि आरक्षण किसी दबाव नहीं, बल्कि पूरी तरह नियमों के तहत हुआ है।
जिलाधिकारी पंकज यादव ने कहा कि नये वार्ड अनारक्षित रखने को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठने के साथ ही आपत्तियां आई हैं।

लेकिन नये वार्ड 31 से 34 तक नहीं थे। जिलाधिकारी के अनुसार परिसीमन में जिस वार्ड में पुराने परिसीमन से हटकर पचास प्रतिशत से ज्यादा बदलाव हुआ है, वह नया वार्ड माना गया है। ऐसे में वह वार्ड एक से लेकर 34 तक कोई भी हो सकता है। उसी बदलाव की मेरिट पर चार नये वार्ड चयनित कर पहले उनका आरक्षण तय किया गया। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति वार्ड आरक्षण का भी प्रतिशत तय होने के साथ एक मानक था। जिलाधिकारी ने आपत्तियों को खारिज करने के बाद कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगी।
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