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संतों का मिलना सबसे बड़ी उपलब्धि : अभयानंद

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रामचरितमानस वर्णन में भक्ति, ज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम
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प्रवचन में बताया संत नारियल के समान, बाहर से कठोर और भीतर से कोमल
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गढ़ रोड राधा गोविंद मंडप में सात दिवसीय सत्संग के विश्राम दिवस पर महामंडलेश्वर अभयानंद सरस्वती ने श्रीरामचरितमानस के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महाभारत में 18 और रामायण में सात गीताओं का उल्लेख है। ज्ञान पुरुष तंत्र है। भक्ति कृपा तंत्र है।
गरुड़ गीता के सप्त प्रश्नों के उत्तर के प्रसंग का भी उन्होंने विस्तार से वर्णन किया। तुलसीदास के कथन के विषय में बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि संसार में दरिद्रता से बढ़कर कोई दुख नहीं और संतों का मिलना सबसे बड़ा सुख है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सदैव सद्विचार रखने, संतों का संग करने और भक्ति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
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सत्संग में मनोज कुमार गुप्ता, बबीता गुप्ता, गोविंद अग्रवाल, आरके प्रसाद, मयंक अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में लोग आरती में शामिल हुए। अंत में प्रसाद वितरण किया गया।
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